डाकिया का टोपी
एक छोटे से गांव में रहने वाले लड़के नीरज के पिता डाकिया थे। वह गांव में सबसे गरीब लोगों में से एक थे। उनकी दुकान एक मोटी तीन-तली इमारत के नीचे थी। वह रोजाना लोगों के पास दाखिले और निवेदन पहुंचाने जाते थे।
एक दिन डाकिया नीरज को एक उपहार देने के लिए घर लौट रहा था। वह अपनी टोपी अपने सिर से ढलाने में मस्त था। नीरज ने उसे ऐसा खुश देखा, जैसे उसने आज तक कुछ नहीं मांगा हो। डाकिया नीरज को अपनी टोपी देने में नहीं लगा होशियार और बस उसे दे गए।
नीरज तब से उस टोपी का ढीला नहीं होता था। उसने उसे साफ करके संवारा, उसे सुरक्षित रखा और हमेशा अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। उसने अक्सर खाली स्थान से खिलौने बनाये और टोपी के साथ उन्हें खेला।
कुछ महीनों बाद, नीरज की टोपी में एक छोटी सी छुट्टी बन गई। जब डाकिया उसे देखता है तो उसे दुख होता है। वह टोपी को सही करने की कोशिश करता है, लेकिन वह भ्रमित हो जाता है और और हाथ धो लेता है। कुछ दिनों तक वह ठीक समझता है कि वह टोपी कोई भी कारणों से सही नहीं हो रहा है।
एक बार डाकिया अपने दोस्त से साथ गांव से बाहर गए थे। वह नीरज और उसकी टोपी को भूल गए थे। जब वह खोज करते हुए खुद को उनके घर के सामने पहुंचते हुए देखते हैं, तो वह देखते हैं कि एक छोटी सी लड़की नीरज की टोपी पहन रही है।
वह चौंकता है। उसने नीरज की मां से पूछा कि यह टोपी किसकी है। मां ने बताया कि वह उनके बच्चे के लिए खेलने में इसे पहन रही थीं।
डाकिया को अपने दोस्त से मिलकर दुःख होता है। वह समझता है कि नीरज उस टोपी से ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया था। उस लड़के ने उस टोपी के लिए बहुत खिलवाड़ किया था।
डाकिया अपने दोस्त से उस टोपी को बहरहाल वापस लौटाने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होते हैं। बस स्कूटर में नीरज के घर जाकर वह उस टोपी के लिए आस-पास उठती खिलौनों की तलाश करता है। वह उसे खुश देखना चाहता है।
डाकिया दुकान पर एक जगह बनाता है जहां उसे उपयुक्त और एक साथ मिलने वाले टोपी के साथ बहुत से अच्छे-खासे खिलौने मिल गए हैं। वह उन्हें नीरज के लिए लेकर जाते हैं।
नीरज के लिए वह एक चमकदार दिन था। जब डाकिया घर में पहुंचता है, तो वह नीरज को खुशी से हँसता हुआ देखता है। उसने उसे उस टोपी के साथ खिलौने और चौकोर का प्रस्ताव भी दिया।
नीरज खुशी से उछलता है और टोपी को अपने सिर से उठाता है। वह जानता है कि टोपी एक खास चीज़ है और डाकिया उसे ज़्यादा प्यार करता है।