Title: हरी बसंत की कहानी
एक बार एक छोटे से गांव में हरी बसंत का त्योहार मनाया जा रहा था। गांव के लोग इस उत्सव को बहुत उल्लास से मान रहे थे। सभी मौज मस्ती कर रहे थे।
उस गांव में एक बहुत ही संवेदाशील लड़के ने अपने पैसे गांव के गरीब लोगों में बाँट दिए थे जिससे सभी का खान-पान भले ही न हो पर उनकी दुख की कुछ तो कमी महसूस हुई थी।
उस लड़के का नाम बाबू था। बाबू एक मंच पर खड़ा होकर लोगों से हरी बसंत का महत्व और महत्वपूर्णता बता रहा था। दूसरी तरफ गांव के बच्चे भी इस अभियान को साथ ले रहे थे और वे भी बहुत उत्सुक थे।
कुछ समय बाद, सभी लोगों ने कुछ खाने-पीने का समय निकाला था। उस समय एक बालक ने सड़क पर धीरे से अपनी रोड़े से बचाने की कोशिश करते हुए हरियाली के इस उत्सव का कुछ जानने के लिए उस मंच के पास जाकर बैठ गया।
बाबू ने उसके पूछे जाने पर बालक ने उसे अपनी प्राथमिक शिक्षा रोक दी है और उसे संध्या शेष दल से बखूबी गुजरा है। उसे पता चला कि बाबू कुछ सामाजिक काम कर रहे हैं।
वह आगे बढ़ाते हुए यह भी बताता है कि हरी बसंत आते ही लोग शॉपिंग करने और सबसे उत्सवात्मक रूपों में इस अवसर का उपयोग करने लगते हैं।
उसके बाद, वह सभी वर्गों के शिक्षक द्वारा आयोजित सामूहिक शिक्षा के बारे में जानता है। वे लोगों के लिए निःशुल्क शिक्षा देते हैं जिससे छोटे बच्चों के उद्यम की विकास में मदद मिलती है।
बाबू जो अब गुजरात के रहने वाले हैं ने गांव में स्कूलों में मुफ्त शिक्षा देने की व्यवस्था की है ताकि गरीब लोगों की तरक्की हो सके। वह ऐसी शिक्षा देने के व्यवस्थापन में लगे हुए हैं। वह भी शिक्षा प्रदान करते हुए आते-आते हरी बसंत के त्योहार आ गया।
हरी बसंत की माहौल में उसे अपने शिक्षा प्रोग्राम के बारे में जानकारी देने का मौका मिला था। अभी भी वह चाहता था कि गांव के हर वर्ग के लोगों के लिए शिक्षा मुफ्त और उपलब्ध हो।
हरी बसंत के त्यौहार के दौरान, लोगों के बीच नेतृत्व करने वाले बाबू एक संगठन के बारे में बात करते हुए सभी को एकता और समानता की भावना समझाने लगे थे। संगठन ने सभी के लिए उचित शिक्षा और सही गाइडेंस प्रदान करने का कार्य किया जा रहा था।
बाबू भी उस संगठन के सदस्यों में शामिल हो गए थे। वह मुफ्त शिक्षा प्रस्ताव लाए जो उन्होंने पुराने दोस्तों की मदद से संभव किया था।
हरी बसंत के त्योहार के दौरान उस गांव की समस्त जनता ने उस संगठन में ट्रस्ट भी बनाया है। नये संगठन ने अब स्पष्ट लक्ष्य केंद्रित करने के साथ-साथ खान-पान की व्यवस्था भी की थी ताकि सभी गरीब लोगों को खाने की अनुमति मिल सके।
वह हरी बसंत के त्यौहार के अनुष्ठान से नहीं बल्कि वह त्यौहार उस गांव के लोगों में एकता और समानता की भावना लाए जो उनके शिक्षा और संघटना में मदद की।
इस कहानी से हमें उत्साह, सदभावना और सहयोग महसूस होता है। बाबू जैसे लोग समाज की सेवा में लगे रहते हैं और उन्हें दूसरों की मदद करते हुए खुद खुशी का अनुभव होता है। हम सबको समस्याओं के समाधान में सहायता करना चाहिए और अधिक संवेदाशील बनना चाहिए।