ड्रैगन की ‘हग-डिप्लोमेसी’ और भारत का ‘बड़ा भाई’ सिंड्रोम: बांग्लादेश का नया लव ट्रायंगल!

कूटनीति के अंतरराष्ट्रीय कैबरे में जब ‘शतरंज की बिसात’ बिछती है, तो सबसे कमजोर मोहरे भी खुद को वज़ीर समझने की भूल कर बैठते हैं। ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की हालिया रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि बांग्लादेश अब चीन के करीब जा रहा है ताकि भारत के ‘अत्यधिक स्नेह’ को ‘बैलेंस’ किया जा सके। वाह रे संतुलन! इसे कहते हैं एक तरफ ‘गंगा का पवित्र जल’ और दूसरी तरफ ‘यांग्त्ज़े नदी का मीठा जहर’ पीना।

ड्रैगन का गर्म पर्स और बड़े भाई का ठंडा सेंटीमेंट

बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार के कर्ताधर्ता मोहम्मद यूनुस को शायद लगता है कि देश सिर्फ नोबेल पुरस्कार के ज्ञान से नहीं, बल्कि चीनी युआन की खनक से चलेगा। दशकों से भारत ने बांग्लादेश को ‘सद्भावना’, ‘मुक्ति संग्राम’ और ‘साझा संस्कृति’ के इमोशनल डोज़ दिए हैं। लेकिन चीन सीधा कूटनीतिक व्यावहारिक है—वह दिल की नहीं, तिजोरी की बात करता है। भारत जहाँ चाय-समौसे की प्लेट पर ‘सोनार बांग्ला’ के गीत गाता है, वहीं ड्रैगन सीधे ‘चेकबुक डिप्लोमेसी’ की तान छेड़ देता है। अब आप ही बताइए, खाली जेब में ऐतिहासिक संबंधों के सिक्के भला कितने दिन खनकेंगे?

शतरंज की बिसात पर ‘बैलेंसिंग एक्ट’ का सर्कस

बांग्लादेश सरकार का यह संतुलन कूटनीति के इतिहास में दर्ज होने लायक है। यह कुछ वैसा ही है जैसे कोई शख्स एक पैर दहकते अंगारे पर और दूसरा पैर बर्फ की सिल्ली पर रखकर कहे कि उसका ‘औसत तापमान’ बिल्कुल सुहाना है। ढाका में बैठे नीति-नियंताओं को लगता है कि वे बीजिंग की गोद में बैठकर दिल्ली को आँखें दिखा सकते हैं, और दिल्ली हमेशा की तरह ‘बड़े भाई का सिंड्रोम’ पालकर खामोश रहेगी। लेकिन वे भूल रहे हैं कि बड़े भाई का हाथ जब आशीर्वाद से हटकर पीठ पर पड़ता है, तो कूटनीति के सारे सुर-ताल बिगड़ जाते हैं।

मुफ्त का लंच और ड्रैगन का जाल

श्रीलंका और मालदीव जैसी कूटनीतिक महान हस्तियों ने चीन की ‘हग डिप्लोमेसी’ (गले लगाने की कला) का जो स्वाद चखा है, उसका हैंगओवर अभी तक उतरा नहीं है। लेकिन बांग्लादेश को लगता है कि उसकी कूटनीतिक पाचन शक्ति कुछ ज्यादा ही मजबूत है। काक-वाणी का स्पष्ट मत है कि जब तक ढाका को यह समझ आएगा कि ड्रैगन का हर ‘गिफ्ट’ एक नया कर्ज का जाल है, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। तब तक के लिए, भारत को ‘बैलेंस’ करने के इस आत्मघाती खेल का मजा लीजिए, क्योंकि तमाशा बिल्कुल मुफ्त है!


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कागा जी