बॉलीवुड में अपनी संजीदा और दमदार फिल्मों के लिए मशहूर डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया ने हाल ही में एक ऐसी बात कह दी है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। ‘काक-वाणी’ की चौपाल पर आज इसी मुद्दे पर चर्चा गर्म है। तिग्मांशु धूलिया का मानना है कि हिंदी सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह वो धागा है जो पूरे देश को अनेकता में एकता के सूत्र में पिरोता है।
उत्तर से दक्षिण तक, हिंदी सिनेमा का जलवा!
ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, तिग्मांशु धूलिया ने कहा कि हिंदी फिल्मों ने देश को भाषाई तौर पर एकजुट करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। अक्सर राजनीति और विवादों में उलझने वाले इस देश को फिल्मों ने एक ऐसी भाषा दी, जिसे कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोग समझते हैं। चाहे वो अमिताभ बच्चन के ‘एंग्री यंग मैन’ वाले डायलॉग हों या फिर शाहरुख खान का बाहें फैलाकर प्यार जताना, देश के कोने-कोने में इन संवादों को बिना किसी ट्रांसलेटर के समझा और सराहा गया है।
‘पान सिंह तोमर’ के डायरेक्टर की खरी-खरी
तिग्मांशु धूलिया, जिन्होंने ‘हासिल’ और ‘पान सिंह तोमर’ जैसी बेहतरीन फिल्में बनाई हैं, हमेशा से अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। उनका कहना है कि जब एक गैर-हिंदी भाषी राज्य का व्यक्ति हिंदी गाने गुनगुनाता है या बॉलीवुड फिल्मों के मजे लेता है, तो वहां भाषा की दीवारें अपने आप गिर जाती हैं। आज के दौर में जब भाषा को लेकर तमाम तरह की बहसें छिड़ी हुई हैं, ऐसे में तिग्मांशु का यह बयान सिनेमा की असली ताकत को दिखाता है।
ओटीटी के दौर में भी बरकरार है ‘बॉलीवुड’ का जादू
काक-वाणी के पाठकों, आज भले ही साउथ सिनेमा और क्षेत्रीय भाषाओं का डंका बज रहा हो, लेकिन तिग्मांशु धूलिया की इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि हिंदी सिनेमा ने ही दशकों तक देश के मनोरंजन उद्योग को संभाले रखा है। ओटीटी के इस नए युग में भी हिंदी कहानियां लोगों के दिलों को छू रही हैं। आखिरकार, राज कपूर के दौर से शुरू हुआ यह सफर आज भी जारी है और देश को अपनी धुन पर नचा रहा है।
तो दोस्तों, तिग्मांशु धूलिया की इस बात से आप कितने सहमत हैं? क्या सचमुच हिंदी सिनेमा ही हमारे देश का असली ‘कनेक्टिंग टूल’ है? कमेंट करके हमें जरूर बताएं और ऐसी ही चटपटी खबरों के लिए पढ़ते रहिए ‘काक-वाणी’!</p
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