द गार्डियन की एक ताजा रिपोर्ट ने हमारी छाती चौड़ी कर दी है। अब तक हम सोचते थे कि भारतीय राजनीति का स्तर केवल इंसानों को ही विचलित करता है, लेकिन नहीं! हमारी महान लोकतांत्रिक व्यवस्था ने अब नाली के सबसे मजबूत और बेशर्म जीव, यानी ‘कॉकरोच’ (तिलचट्टा) को भी हिलाकर रख दिया है। खबर आई है कि एक क्रांतिकारी कॉकरोच ने भारतीय राजनेताओं को ‘ईमानदारी’ का पाठ पढ़ाने के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया है। काक-वाणी इस ऐतिहासिक और ऐतिहासिक रूप से घृणास्पद आंदोलन का पुरजोर समर्थन करती है!
परमाणु हमले से बचने वाला जीव नेताओं के झूठ से डर गया!
वैज्ञानिक सालों से चिल्ला रहे हैं कि कॉकरोच परमाणु हमले को भी झेल सकता है, लेकिन वे यह भूल गए कि वह भारतीय नेताओं के चुनावी वादों और उनके ‘भ्रष्टाचार-मुक्त’ दावों को नहीं झेल सकता। बेचारे कॉकरोच ने तंग आकर अनशन का रास्ता चुना है। उसका मानना है कि “ईमानदार नेता ही बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी हैं।” अब सोचिए, जिस देश में करोड़ों इंसानों ने नेताओं के झूठ को अपनी नियति मानकर पचा लिया हो, वहां एक कीड़े को नैतिकता के लिए अनशन पर बैठना पड़ रहा है। क्या यही है हमारा ‘न्यू इंडिया’?
नेताओं की ‘पाचन शक्ति’ से डरा कॉकरोच
इस आंदोलनकारी कॉकरोच के गुप्त सूत्रों (जो शायद किसी सरकारी दफ्तर के सिंक में रहते हैं) से पता चला है कि वह नेताओं की ‘पाचन शक्ति’ से बेहद ईर्ष्या और भय में है। कॉकरोच सड़ी-गली चीजों को खाकर जिंदा रहता है, लेकिन हमारे माननीय नेता तो चमचमाती सड़कों का तारकोल, गरीबों का राशन, कोयला और यहां तक कि हवा में उड़ती योजनाएं भी डकार जाते हैं। कॉकरोच का कहना है कि जब सारा माल नेता ही खा जाएंगे, तो वह नाली में क्या ढूंढेगा? यह सीधे तौर पर कॉकरोच बिरादरी के पेट पर लात है!
राजनीतिक दलों की त्वरित प्रतिक्रिया: “यह विदेशी साजिश है!”
हमेशा की तरह, हमारे संवेदनशील राजनेताओं ने इस अनशन को गंभीरता से लिया है। एक सत्ताधारी प्रवक्ता ने गर्म चाय की चुस्की लेते हुए कहा, “यह कॉकरोच विपक्ष का एजेंट है और देश की छवि खराब करने के लिए विदेशी कीटनाशक कंपनियों के इशारे पर काम कर रहा है।” वहीं विपक्ष ने दावा किया है कि सरकार ने कॉकरोचों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया है और उन्हें लाल-हित की जगह केवल जुमले परोसे जा रहे हैं।
अंत में, काक-वाणी की ओर से हम उस नन्हे क्रांतिकारी कॉकरोच को लाल सलाम भेजते हैं। वैसे, हमें डर है कि कहीं हमारे चतुर नेता उसे भी अपनी पार्टी में शामिल न कर लें, क्योंकि पाला बदलने और किसी भी गंदगी में फिट हो जाने की कला में तो नेताओं और कॉकरोच, दोनों का कोई सानी नहीं है!
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