फिल्म ‘रांझणा’ का वो बनारसी लड़का कुंदन याद है आपको? जी हां, हम बात कर रहे हैं साउथ और बॉलीवुड के सबसे वर्सटाइल एक्टर्स में से एक, धनुष की! अपने अभिनय से हर किसी को अपना मुरीद बनाने वाले धनुष ने अब सिनेमा इंडस्ट्री में चल रही सबसे बड़ी बहस पर एक बेहद कड़क बयान दिया है। जब भी कोई फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर होती है, तो सोशल मीडिया पर ‘बॉलीवुड बनाम साउथ सिनेमा’ का युद्ध शुरू हो जाता है। लेकिन धनुष का मानना है कि अब इस नॉर्थ-साउथ की काल्पनिक दीवार को तोड़ने का सही वक्त आ गया है!
“सिर्फ इंडियन सिनेमा कहो साहब!” – धनुष की खरी-खरी
हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान धनुष ने अपने दिल की बात सामने रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हमें अब ‘नॉर्थ सिनेमा’ या ‘साउथ सिनेमा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। धनुष का मानना है कि फिल्म तो बस फिल्म होती है, चाहे वो चेन्नई में बने या मुंबई में। सिनेमा को अलग-अलग खानों में बांटने के बजाय सिर्फ ‘भारतीय सिनेमा’ (Indian Cinema) कहा जाना चाहिए। आखिर जब कला और भावनाओं की कोई सीमा नहीं होती, तो फिर हमारी फिल्मों को दिशाओं के जाल में क्यों उलझाया जाए?
रांझणा का कुंदन अब पूरे भारत को एक रंग में देखना चाहता है
धनुष खुद इस बात की जीती-जागती मिसाल हैं कि टैलेंट किसी भाषा का मोहताज नहीं होता। तमिल सिनेमा में अपना सिक्का जमाने के बाद उन्होंने ‘रांझणा’ और ‘अतरंगी रे’ जैसी फिल्मों से हिंदी दर्शकों के दिलों पर राज किया। इतना ही नहीं, उन्होंने हॉलीवुड फिल्म ‘द ग्रे मैन’ में भी अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा है। ऐसे में जब एक ग्लोबल स्टार यह बात कहता है, तो बॉलीवुड से लेकर टॉलीवुड तक सबको इस पर गौर करना चाहिए।
आजकल का दौर भी इसी बदलाव का गवाह बन रहा है। ‘आरआरआर’, ‘केजीएफ’, ‘पुष्पा’, ‘जवान’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ जैसी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट में दम है, तो दर्शक भाषा की परवाह किए बिना थिएटर्स में भीड़ लगा देते हैं।
काक-वाणी का टेक: अब तो मान जाओ सिनेमा प्रेमियों!
‘काक-वाणी’ की पैनी नजर हमेशा सिनेमा की हर खबर पर रहती है। धनुष की यह बात वाकई दिल छू लेने वाली है। जब साउथ के एक्टर्स नॉर्थ में धूम मचा रहे हैं और बॉलीवुड के सितारे साउथ के डायरेक्टर्स के साथ काम कर रहे हैं, तो फिर यह भेदभाव किसलिए? अब वक्त आ गया है कि हम सब ‘बॉलीवुड’ और ‘टॉलीवुड’ के टैग्स को भूलकर सिर्फ एक पहचान पर गर्व करें और वो है—हमारा भारतीय सिनेमा! तो अगली बार जब कोई फिल्म देखें, तो भाषा भूलकर बस सिनेमा का मजा लें!
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