सिनेमा की दुनिया में अब वो दौर चला गया जब हम फिल्मों को ‘बॉलीवुड’ या ‘टॉलीवुड’ के संकीर्ण दायरों में बांटते थे। आज का दौर है Pan-India Stars का, जिन्होंने अपनी दमदार अदाकारी और करिश्मे से भाषा की हर दीवार को ढहा दिया है। ‘काक-वाणी’ के इस खास गलियारे में आज हम बात करेंगे उन चुनिंदा कलाकारों की, जिन्होंने पूरे देश को अपना दीवाना बना लिया है। आर माधवन, दुलकर सलमान और कुणाल कपूर जैसे सितारे इस बदलाव के सबसे बड़े चमकते चेहरे हैं।
आर माधवन: सदाबहार ‘मैडी’ का पैन-इंडिया सफर
जब बात पैन-इंडिया पहचान की आती है, तो आर माधवन का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। तमिल सिनेमा से करियर की शुरुआत करने वाले माधवन ने ‘रहना है तेरे दिल में’ के ‘मैडी’ बनकर उत्तर भारत के दर्शकों के दिलों में जो जगह बनाई, वो आज भी कायम है। चाहे ‘3 इडियट्स’ के फरहान हों या फिर ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ के नंबी नारायणन, माधवन ने साबित किया है कि बेहतरीन अभिनय को किसी भाषा की जरूरत नहीं होती। उन्होंने खुद को केवल एक इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रखा और आज वे पूरे देश के चहेते स्टार हैं।
दुलकर सलमान: सादगी से जीता पूरे देश का दिल
मलयालम सिनेमा के दिग्गज मम्मूटी के बेटे होने के बावजूद, दुलकर सलमान ने अपनी खुद की एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है। फिल्म ‘कारवां’ से हिंदी दर्शकों के बीच कदम रखने वाले दुलकर ने जब ‘सीता रामम’ के जरिए स्क्रीन पर अपनी मोहब्बत का जादू बिखेरा, तो पूरा देश उनका दीवाना हो गया। दुलकर की यूएसपी उनकी सादगी और आंखों से अभिनय करने की कला है। तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी फिल्मों में समान रूप से सक्रिय रहकर उन्होंने दिखा दिया है कि वे एक सच्चे पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं।
कुणाल कपूर: लीक से हटकर बनाई पहचान
‘रंग दे बसंती’ के ‘अस्लम’ यानी कुणाल कपूर हमेशा से ही कुछ अलग करने के लिए जाने जाते रहे हैं। कुणाल ने न केवल बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया, बल्कि वे साउथ की फिल्मों में भी अपनी धाक जमा चुके हैं। मलयालम फिल्म ‘वीरम’ में उनके योद्धा वाले लुक और दमदार अभिनय की देश भर में जमकर तारीफ हुई थी। कुणाल कपूर उन चुनिंदा अभिनेताओं में से हैं जो मुख्यधारा की फिल्मों के साथ-साथ क्षेत्रीय सिनेमा में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने से पीछे नहीं हटते।
काक-वाणी की राय: सिनेमा हुआ एक, दर्शक हुए अनेक
इन कलाकारों की सफलता यह साबित करती है कि भारतीय सिनेमा अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। अब कंटेंट ही असली किंग है और जो कलाकार दर्शकों की नब्ज पहचानता है, वही असली सिकंदर है। ‘काक-वाणी’ का मानना है कि इन पैन-इंडिया सितारों ने क्षेत्रीय भाषाओं के फासलों को पाटकर पूरे देश को एक ही सिनेमाई धागे में पिरो दिया है। आगे देखना दिलचस्प होगा कि यह कारवां और कितनी ऊंचाइयों को छूता है!
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