मानसून सत्र का ‘फोटोशूट’: विपक्ष को मिलीं सुर्खियां, संसद को मिली सिर्फ ‘छुट्टियां’!

कांव-कांव! लीजिए साहब, लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में ‘मानसून का तमाशा’ समाप्त हुआ। दिल्ली की सड़कों पर तो पानी भरा ही, लेकिन हमारी संसद में जो ‘हंगामे’ की बाढ़ आई, उसने पूरे देश को तर-बतर कर दिया। अब मीडिया में गंभीर चर्चा चल रही है कि इस सत्र में विपक्ष ‘ऑप्टिक्स’ (यानी कैमरे के सामने खुद को सही दिखाने) की लड़ाई जीत गया।

वाह भाई वाह! क्या ऐतिहासिक जीत है! जब देश की सर्वोच्च संस्था में काम-काज ठप होता है, तो सबसे ज्यादा खुशी इसी बात की होती है कि ‘फोटो किसकी अच्छी आई?’

विपक्ष के पास इस बार ‘ऑप्टिक्स’ का जबरदस्त हथियार था। कभी हाथ में संविधान की प्रति लेकर विक्ट्री साइन बनाना, कभी गले में महंगाई की माला पहनकर पोज देना, तो कभी संसद परिसर में ‘वॉकआउट’ का ऐसा कैटवॉक करना कि बड़े-बड़े मॉडल शरमा जाएं। अगर संसद में गंभीर मुद्दों पर बहस के बजाय ‘बेस्ट पोज’ की प्रतियोगिता होती, तो इस बार विपक्ष को ‘ऑस्कर’ मिलना तय था। कैमरे के सामने नेताओं के हाव-भाव ऐसे थे मानो देश की सारी समस्याएं संसद से बाहर कदम रखते ही हल हो जाएंगी।

अब जरा इस सिक्के का दूसरा पहलू भी देख लेते हैं। इस चमचमाती ‘ऑप्टिक्स’ की लड़ाई में संसद ने क्या खोया?

अरे हुजूर! संसद ने सिर्फ वही खोया जो उसके पास वैसे भी फालतू पड़ा था—जैसे कि मर्यादा, जनता के मुद्दों पर सार्थक बहस, टैक्सपेयर्स के करोड़ों रुपये और वो उबाऊ से कानून जिन पर चर्चा करने का कष्ट हमारे माननीय सांसदों को उठाना पड़ता। जब बिना किसी शोर-शराबे के, महज 10 मिनट में चीख-पुकार के बीच बिल पास किए जा सकते हैं, तो भला संसद का समय बहस में क्यों बर्बाद करना?

सत्तापक्ष इसलिए खुश है कि बिना किसी तीखे सवाल का सामना किए उनके सारे सरकारी बिल पास हो गए। विपक्ष इसलिए गद्गद है कि उनके सोशल मीडिया हैंडल्स पर रील्स और ट्रेंड्स की बाढ़ आ गई। और जनता? जनता बेचारी इस ‘संसदीय थियेटर’ का टिकट अपनी जेब से भारी टैक्स देकर खरीदती है और दर्शक दीर्घा में बैठकर तालियां बजाती है।

‘काक-वाणी’ की सीधी सलाह है: अगली बार से संसद का मानसून सत्र दिल्ली के बजाय मुंबई की फिल्म सिटी में आयोजित किया जाना चाहिए। वहां कम से कम लाइट, कैमरा और ‘ऑप्टिक्स’ के एंगल तो बेहतर मिलेंगे!

तब तक के लिए, कांव-कांव!


संदर्भ मुख्य समाचार: Monsoon Session: Did the Opposition win the optics battle — and what did Parliament lose? – CNBC TV18

कागा जी