यूनेस्को का अवार्ड और नासा की मुहर: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के वो सच जो विज्ञान को भी घुटनों पर ला दें!

दीक्षांत समारोह से पहले का ज्ञान: आपका स्वागत है व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में!

यदि आपके पास सुबह-सुबह ‘शुभ प्रभात’ के रंग-बिरंगे गुलाबों के साथ ‘यूनेस्को द्वारा भारतीय राष्ट्रगान को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने’ का संदेश नहीं आया, तो समझ लीजिए आपका दिन अभी शुरू ही नहीं हुआ। ‘काक-वाणी’ के इस विशेष खंड में हम सीधे उस विश्वविद्यालय के कैंपस से रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जिसका कोई भौतिक भूगोल नहीं है, लेकिन यहाँ इतिहास और भूगोल रोज बदले जाते हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की, जहाँ ज्ञान की गंगा सीधे ‘फॉरवर्डेड’ के बटन से बहती है और हर नागरिक बिना परीक्षा दिए ही महाज्ञानी बन जाता है।

नासा की अनोखी खोज और हमारे घरेलू फूफाजी

इस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं (जो अक्सर हमारे दूर के फूफाजी या रिटायर्ड मौसाजी होते हैं) ने ऐसी-ऐसी वैज्ञानिक खोजें की हैं कि बेचारे अल्बर्ट आइंस्टीन स्वर्ग में बैठकर अपना सिर पीट रहे होंगे। हालिया शोध के अनुसार, यदि आप रात को सोते समय अपने पैर के अंगूठे पर सरसों का शुद्ध तेल लगाएंगे, तो आपकी आँखों की रोशनी इतनी तेज हो जाएगी कि आप पड़ोसी के घर में पक रहे खाने का नमक भी दूर से देख लेंगे। इतना ही नहीं, नासा के वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि दीवाली की रात अंतरिक्ष से केवल भारत ही जगमगाता हुआ दिखता है। नासा वाले खुद हैरान हैं, लेकिन हमारे व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन ने इस रहस्य को तीन सेकंड में डिकोड कर दिया!

कैंसर का इलाज अब आपकी रसोई के मसाले दानी में!

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में तो इस यूनिवर्सिटी ने नोबेल पुरस्कार विजेताओं को भी पानी पिला दिया है। यहाँ हर गंभीर बीमारी का इलाज रसोई के मसालों में छिपा है। ‘गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से कैंसर जड़ से खत्म’ – यह संदेश भेजने वाले चचा खुद सुबह-सुबह कचौड़ी-जलेबी पर टूट पड़ते हैं। डॉक्टरों ने सालों पढ़ाई करके जो डिग्रियां ली हैं, वे व्हाट्सएप के ‘एक चमत्कारी काढ़े’ वाले नुस्खे के आगे पानी भरती नजर आती हैं। आखिर लाखों रुपये की कीमोथेरेपी का क्या काम, जब काम सिर्फ एक चम्मच हल्दी से हो सकता है?

‘फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड’ – परम सत्य की एकमात्र ढाल

इस पूरी ज्ञान-गंगा की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहाँ कोई भी अपनी बात की जिम्मेदारी नहीं लेता। संदेश के अंत में चुपके से लिख दिया जाता है – ‘फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड’ (जैसा मिला, वैसा भेज दिया)। यानी, राय हमारी नहीं है, हम तो बस समाज कल्याण के लिए इस परम सत्य को आप तक पहुँचा रहे हैं। तो अगली बार जब आपके पास संदेश आए कि ‘इस मैसेज को तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक बड़ी खुशखबरी मिलेगी’, तो देर मत कीजिए। क्या पता, 11वें व्यक्ति को भेजते ही आपके बैंक खाते में व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की तरफ से मुफ्त ज्ञान की मानद डॉक्टरेट डिग्री ट्रांसफर हो जाए!

कागा जी