देश के महान लोकतंत्र में अगर किसी चीज की खपत सबसे ज्यादा बढ़ी है, तो वह है हमारे राजनेताओं के जूतों का तला! जननायक राहुल गांधी जी और उनके ‘इंडी गठबंधन’ के शूरवीरों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश की राजनीति अब विचारों से नहीं, बल्कि पेडोमीटर के आंकड़ों से तय होती है। ताजा खबर है कि अब यह महान कुनबा संसद के गलियारों से निकलकर सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च करने वाला है। वजह? विरोध प्रदर्शन का कोटा पूरा करना है, और टहलने का नया बहाना चाहिए!
संसद से सुप्रीम कोर्ट: मॉर्निंग वॉक का नया पॉलिटिकल रूट!
राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं कि जब संसद में हंगामा काम न आए, तो उसका इलाज सुप्रीम कोर्ट के बाहर सड़क नापने में कैसे हो सकता है? लेकिन ‘काक-वाणी’ की पारखी नजर से देखिए तो गणित बेहद सीधा है। संसद भवन में तख्तियां लहराते-लहराते जब कंधे थक जाएं, तो थोड़ा पैरों को भी वर्कआउट मिलना ही चाहिए। आखिर फिटनेस भी तो कोई चीज है! सुप्रीम कोर्ट जाना वैसे भी आजकल का सबसे ट्रेंडी पॉलिटिकल फैशन बन चुका है। जनता चुनाव में वोट दे या न दे, लेकिन अगर आप सुप्रीम कोर्ट की तरफ हाथ में तख्ती लेकर गंभीर चेहरा बना लें, तो टीवी चैनलों के कैमरे अपने आप आपकी तरफ झुक जाते हैं।
जब अदालत ही निभाएगी विपक्ष का फर्ज!
इंडी गठबंधन के इन महान रणनीतिकारों की दाद देनी होगी। चुनाव हारना अपनी जगह है, लेकिन सड़क पर मार्च निकालना अपनी जगह। इस बार का प्लान तो और भी क्रांतिकारी है। जब संसद में अपनी बात मनवाना मुश्किल हो जाए, तो लोकतंत्र बचाने का सबसे आसान तरीका है—न्यायालय के दरवाजे तक टहलते हुए चले जाओ! ऐसा लगता है जैसे विपक्षी दलों ने मान लिया है कि चुनाव जीतना उनका काम नहीं, और सरकार से सवाल पूछने की जिम्मेदारी अब सिर्फ जजों की है।
गठबंधन की अद्भुत ‘एकता’ भी केवल ऐसे ही वाकाथॉन में देखने को मिलती है। राज्यों के चुनाव में भले ही ये एक-दूसरे की टांग खींच लें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रास्ते में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चलने में कोई परहेज नहीं है। काक-वाणी का सीधा सवाल है: क्या अब सुप्रीम कोर्ट के जज साहबान विपक्ष का काम संभालेंगे और अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस भी वही करेंगे?
बहरहाल, इस विरोध प्रदर्शन से देश का लोकतंत्र कितना बचेगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन जूतों की कंपनियों की बिक्री जरूर बढ़ जाएगी। राहुल जी को हमारी मुफ्त सलाह है कि वे दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पहले ही अपना वॉकिंग शेड्यूल भेज दिया करें, ताकि आम जनता को पता रहे कि आज लोकतंत्र बचाने के चक्कर में कौन सा रास्ता जाम होने वाला है!
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