रील-क्रांति के नए पैगंबर: जब प्रार्थना छोड़कर सड़क पर उतरे ‘इंस्टा-योद्धा’

वाह! ‘द प्रिंट’ के बुद्धिजीवियों ने क्या गजब की खोज की है। उन्होंने पता लगाया है कि भारत की ‘जेन जी’ (Gen Z) यानी हमारी नई नवेली पीढ़ी अब मंदिरों और मस्जिदों में दुआएं मांगने के बजाय सड़कों पर लड़ रही है। सचमुच, इस ऐतिहासिक खुलासे के बाद देश के तमाम समाजशास्त्रियों ने अपनी डिग्रियां गंगा में विसर्जित करने का मन बना लिया है। काक-वाणी इस महान बौद्धिक विमर्श का स्वागत करती है और उन ‘इंस्टा-योद्धाओं’ को नमन करती है जो बिना ‘एस्थेटिक फिल्टर’ के कोई क्रांति शुरू नहीं करते।

भगवान से ज्यादा वाई-फाई पर भरोसा

इस रिपोर्ट के अनुसार, आज का युवा प्रार्थना नहीं कर रहा। भला करे भी क्यों? भगवान से मन्नत मांगने पर जवाब आने में समय लगता है, जबकि सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी हैशटैग चलाने पर ‘लाइक्स’ और ‘रीट्वीट’ तुरंत मिल जाते हैं। हमारे देश के भारतीय राजनेता इस नई आफत से बेहद परेशान हैं। पहले की राजनीति बड़ी आसान थी—भीड़ जुटानी हो तो बिरयानी और बस की व्यवस्था कर दो। लेकिन इस ‘जेन जी’ को आप क्या देंगे? इन्हें न तो आपकी मुफ्त बिजली चाहिए और न ही पारंपरिक वादे। इन्हें चाहिए धरना स्थल पर हाई-स्पीड वाई-फाई और चाय की जगह ‘कैपुचीनो’!

बिना ‘कैप्शन’ के क्रांति अधूरी है

राजनीति के पुराने धुरंधर हैरान हैं कि यह कैसी लड़ाई है जहां नारों से ज्यादा ध्यान इस बात पर दिया जाता है कि ‘प्लेकार्ड’ का फॉन्ट स्टाइल क्या है। ‘लड़ेंगे-जीतेंगे’ वाले दौर के बूढ़े नेता कोने में बैठकर सोच रहे हैं कि आखिर ‘सिग्मा मेल’ और ‘एस्थेटिक रील्स’ के जरिए कौन सी क्रांति आने वाली है? बुद्धिजीवी लिख रहे हैं कि यह आंदोलन राजनीति से बड़ा है। बिल्कुल बड़ा है साहब! राजनीति तो सिर्फ सत्ता बदलती है, लेकिन यह आंदोलन तो सीधे इंस्टाग्राम की ‘एल्गोरिदम’ को चुनौती दे रहा है। जब तक आंदोलन की रील पर ‘ट्रेंडिंग ऑडियो’ न बजे, तब तक क्रांति अधूरी मानी जाती है।

राजनीति का नया ‘स्टार्टअप’

अंततः, इस रिपोर्ट ने हमारे भारतीय राजनेता वर्ग को एक नया बिजनेस मॉडल दे दिया है। अब पार्टियों के आईटी सेल नहीं, बल्कि ‘इन्फ्लुएंसर विंग’ बनाए जा रहे हैं। अगर देश की युवा पीढ़ी प्रार्थना नहीं कर रही, तो शायद वे नेताओं के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं—क्योंकि जो युवा भगवान से नहीं डरता, वो भला चुनाव आयोग और पुलिस के डंडे से क्या डरेगा? खैर, जब तक फोन में 5G का रिचार्ज है, तब तक भारत की यह ‘फाइटिंग’ स्पिरिट सुरक्षित है। जैसे ही डेटा पैक खत्म होगा, शायद दोबारा ‘हे भगवान, नेट चलवा दो’ वाली प्रार्थना शुरू हो जाएगी।


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कागा जी