एक जमाना था जब बॉलीवुड फिल्मों में ‘रामपुर’ और ‘श्यामपुर’ जैसे गांवों का जलवा हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे हमारे फिल्ममेकर्स को लंदन के टॉवर ब्रिज और स्विट्जरलैंड की वादियों से ऐसा प्यार हुआ कि वे भारतीय गांवों का रास्ता ही भूल गए। बमुश्किल किसी फिल्म में गांव दिखता भी था, तो वह सिर्फ हीरो-हीरोइन के सरसों के खेत में रोमांस करने तक सीमित रह गया था। लेकिन अब वक्त बदल गया है! बॉलीवुड ने जिस ‘गांव’ को अपनी स्क्रिप्ट से बेदखल कर दिया था, उसकी ओटीटी (OTT) पर ऐसी धमाकेदार वापसी हुई है कि बड़े-बड़े स्टार्स भी देखते रह गए हैं।
जब बॉलीवुड भूल गया था गोबर-मिट्टी की खुशबू
90 के दशक के बाद बॉलीवुड का फोकस पूरी तरह से बदल गया था। फिल्मों में चमचमाते विला, विदेशों की लोकेशंस और अमीर एनआरआई (NRI) परिवारों की कहानियां छा गईं। गांव की सादगी, वहां की पंचायतें, और चौपाल की गपशप को आउटडेटेड मान लिया गया। ऐसा लगने लगा कि जैसे भारत सिर्फ मुंबई, दिल्ली और न्यूयॉर्क में ही बसता है। लेकिन दर्शक कब तक केवल नकली और हवा-हवाई कहानियों से अपना दिल बहलाते? उन्हें तलाश थी अपनी मिट्टी की खुशबू और असली किरदारों की, जिन्हें मुख्यधारा के सिनेमा ने पूरी तरह अनदेखा कर दिया था।
ओटीटी की लहर और ‘फुलेरा’ का जादू
जब डिजिटल क्रांति आई और ओटीटी का दौर शुरू हुआ, तो नए जमाने के कहानीकारों ने सीधे भारत के दिल यानी गांवों में दस्तक दी। वेब सीरीज पंचायत (Panchayat) ने यह साबित कर दिया कि दर्शकों को बांधने के लिए किसी बड़े सुपरस्टार या विदेशी लोकेशन की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें एक सच्चे और प्रासंगिक किरदार की तलाश है। फुलेरा गांव के सचिव जी, प्रधान जी, प्रहलाद और विकास ने मिलकर दर्शकों को वह सुकून और हंसी दी जो सालों से सिनेमाघरों से गायब थी। इसी तरह ‘मिर्जापुर’, ‘गुल्लक’ और ‘जामतारा’ जैसी सीरीज ने छोटे शहरों और गांवों की वास्तविकताओं, वहां के संघर्ष और देसी अंदाज को इतने मजेदार तरीके से पेश किया कि लोग इसके दीवाने हो गए।
देसी स्वाद का कोई मुकाबला नहीं!
आज स्थिति यह है कि दर्शक मर्सिडीज और ऑडी कारों से ज्यादा गांव की टूटी सड़कों और देसी जुगाड़ को देखना पसंद कर रहे हैं। ओटीटी ने यह साबित कर दिया है कि असली और दमदार कहानियां शहरों के आलीशान फ्लैटों में नहीं, बल्कि गांवों की चौपालों और गलियों में बिखरी पड़ी हैं। ‘काक-वाणी’ का मानना है कि अब जब गांव की कहानियों की ओटीटी पर शानदार वापसी हो चुकी है, तो बॉलीवुड को भी अपनी चमचमाती काल्पनिक दुनिया से बाहर निकलकर इस जमीनी हकीकत को गले लगाना ही होगा। आखिरकार, असली हिंदुस्तान तो गांवों में ही बसता है!
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