व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया ‘सच्चाई मीटर’: अब फैक्ट नहीं, केवल ‘इमोशन’ चेक होगा!

प्रिय देशवासियों और व्हाट्सएप के कर्मठ नागरिकों! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। जैसा कि आप जानते हैं, हमारे देश में ज्ञान का असली स्रोत अब पुस्तकालय या स्कूल-कॉलेज नहीं, बल्कि सुबह-सुबह आने वाले ‘गुड मॉर्निंग’ मैसेज और उनके पीछे छिपे महान वैज्ञानिक दावे हैं। हाल ही में हमारी प्रिय यूनिवर्सिटी ने अपना नया ‘फैक्ट चेक’ सिस्टम लॉन्च किया है। इसके नियम इतने अद्भुत हैं कि न्यूटन और आइंस्टीन भी स्वर्ग में बैठकर अपनी डिग्रियों पर आंसू बहा रहे होंगे।

नए फैक्ट-चेक के अनोखे नियम

पुराने जमाने के पत्रकार और वैज्ञानिक तथ्यों की जांच के लिए सबूत, रिसर्च और लॉजिक मांगते थे। लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नए ‘गोल्डन रूल’ के अनुसार, किसी भी खबर को सच मानने के लिए केवल तीन चीजें ही काफी हैं। पहला, मैसेज में ‘यूनेस्को’ (UNESCO) का नाम होना चाहिए। दूसरा, नासा (NASA) के वैज्ञानिकों द्वारा उस पर आश्चर्य व्यक्त किया जाना चाहिए। और तीसरा, मैसेज के अंत में ‘इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक बड़ी खुशखबरी मिलेगी’ लिखा होना चाहिए। अगर ये तीनों शर्तें पूरी होती हैं, तो वह खबर परम सत्य है, चाहे उसमें यह दावा ही क्यों न किया गया हो कि हरी मिर्च चबाने से घर का वाई-फाई सिग्नल मजबूत हो जाता है!

इमोशनल इंडेक्स और एडमिन की मर्जी

इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम में ‘इमोशनल इंडेक्स’ को सबसे ऊपर रखा गया है। अगर किसी खबर को पढ़कर आपकी आंखों में आंसू आ जाएं, देशप्रेम जाग उठे या फिर पड़ोसी देश के प्रति गुस्सा उबलने लगे, तो समझ लीजिए कि वह सौ फीसदी प्रमाणित सच है। इसके लिए किसी सरकारी आंकड़ों या वैज्ञानिक रिसर्च की कोई जरूरत नहीं है। यूनिवर्सिटी के कुलपति (जो आपके परिवार के ग्रुप वाले फूफा जी भी हो सकते हैं) का स्पष्ट मानना है कि तर्क करना और सबूत मांगना सीधे-सीधे विद्रोह है। यदि कोई व्यक्ति किसी वायरल मैसेज पर सवाल उठाता है, तो उसे ‘एंटी-ग्रुप’ मानकर तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है।

काक-वाणी की अंतिम चेतावनी

इसलिए, अगली बार जब आपके पास कोई ऐसा मैसेज आए कि ‘नींबू पानी पीने से इंसान उड़ने की शक्ति पा सकता है’, तो अपना छोटा सा दिमाग बिल्कुल न लगाएं। तुरंत ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाएं और समाज सुधार में अपना अमूल्य योगदान दें। याद रखिए, विज्ञान तो बदलता रहता है, लेकिन फूफा जी का भेजा हुआ फॉरवर्ड अमर रहता है। काक-वाणी का यही संदेश है—फैक्ट चेक के चक्कर में अपना समय बर्बाद न करें, बस आंखें बंद करें और फॉरवर्ड करते रहें!

कागा जी