नमस्ते ज्ञानपिपासु मित्रों! ‘काक-वाणी’ के विशेष स्तंभ ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। हमारे देश में ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज भले ही पीछे छूट जाएं, लेकिन हमारी ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ दुनिया की इकलौती ऐसी संस्था है जहाँ बिना पढ़े-लिखे भी रोज़ सुबह 6 बजे ज्ञान के भंडार बांटे जाते हैं। यहाँ के प्रोफेसर कोई वैज्ञानिक नहीं, बल्कि आपके अपने ‘शर्मा अंकल’ और ‘मामा जी’ हैं, जिनका एकमात्र लक्ष्य आपकी बुद्धि का विकास (या विनाश) करना है।
1. ‘यूनेस्को’ का पसंदीदा काम: भारत को ट्रॉफी बांटना
व्हाट्सएप का सबसे पसंदीदा झूठ है यूनेस्को। बेचारी अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनेस्को का आधा समय तो व्हाट्सएप के ज्ञानी ही तय करते हैं। कभी भारतीय राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे बेहतरीन राष्ट्रगान घोषित कर दिया जाता है, तो कभी हमारी ‘हिंदी’ भाषा को दुनिया की सबसे मीठी भाषा का अवॉर्ड मिल जाता है। फैक्ट चेक यह है कि यूनेस्को वाले अपने दफ्तर में बैठकर आराम से चाय पी रहे होते हैं और यहाँ हमारे ‘गुप्ता जी’ पूरे गर्व से 50 ग्रुप्स में यह फर्जी खबर फॉरवर्ड ठोक चुके होते हैं।
2. नासा की लैब और नींबू-मिर्च का चमत्कार
दूसरा सबसे बड़ा सच (जो केवल व्हाट्सएप पर सच है) यह है कि नासा वाले रात-दिन केवल भारतीय परंपराओं पर शोध कर रहे हैं। “रात को तकिए के नीचे प्याज़ रखो, गंभीर से गंभीर बीमारी भाग जाएगी” या “सुबह गर्म पानी में नींबू निचोड़ो, कैंसर गायब हो जाएगा”—ऐसे दावों को देखकर तो बड़े-बड़े डॉक्टर भी अपनी डिग्रियां फाड़ने की सोचने लगते हैं। नासा ने अंतरिक्ष में कौन सा संगीत सुना, इसका वैज्ञानिक प्रमाण केवल व्हाट्सएप के पास ही उपलब्ध है।
3. “11 लोगों को भेजो, वरना शाम तक…”
ज्ञान के साथ-साथ यहाँ भय का बाज़ार भी खूब गर्म रहता है। “इस चमत्कारी फोटो को 11 लोगों को तुरंत फॉरवर्ड करें, शाम 5 बजे तक कोई बड़ी खुशखबरी मिलेगी। इग्नोर किया तो भारी नुकसान होगा।” भाई साहब, अगर 11 लोगों को मैसेज भेजने से ही देश की गरीबी दूर होती और लॉटरी लगती, तो हमारे देश के युवा नौकरियों के फॉर्म भरने के बजाय केवल फॉरवर्ड-फॉरवर्ड खेल रहे होते!
निष्कर्ष: थोड़ा ब्रेक लीजिए, दिमाग चलाइए
व्हाट्सएप पर आने वाला हर ‘फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड’ संदेश सच नहीं होता। जब तक आप बिना सोचे-समझे नीले बटन पर उंगली दबाते रहेंगे, तब तक यह यूनिवर्सिटी बिना किसी फीस के चलती रहेगी। इसलिए काक-वाणी की सीधी और कड़वी सलाह है: अपनी उंगली को थोड़ा विश्राम दें और कोई भी अफवाह आगे बढ़ाने से पहले अपने खुद के ‘मस्तिष्क’ का इस्तेमाल ज़रूर करें!