प्रणाम! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। यह वह महान विश्वविद्यालय है जहां ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड के प्रोफेसर भी एडमिशन लेने के लिए तरसते हैं। यहां ज्ञान की गंगा बहती नहीं, बल्कि ‘Forwarded as received’ के रूप में बाढ़ लाती है। तो चलिए, आज इस यूनिवर्सिटी के कुछ ऐसे ‘परम सत्यों’ का पोस्टमार्टम करते हैं, जिन्होंने विज्ञान और सामान्य ज्ञान की धज्जियां उड़ा रखी हैं।
1. यूनेस्को का ‘राष्ट्रीय खेल’: हर भारतीय चीज को सर्वश्रेष्ठ घोषित करना
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के अनुसार, यूनेस्को के पास दुनिया में और कोई काम नहीं बचा है। उसने पहले भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया, फिर हमारी दो हजार की गुलाबी पत्ती (नोट) को दुनिया की सबसे खूबसूरत करेंसी बताया, जिसमें जीपीएस चिप भी लगी थी! हाल ही में तो हद ही हो गई जब खबर आई कि यूनेस्को ने शर्मा जी के सुपुत्र को ‘दुनिया का सबसे आज्ञाकारी बेटा’ घोषित कर दिया है। सच यह है: यूनेस्को को खुद नहीं पता कि वह भारत के व्हाट्सएप ग्रुप्स में इतना सक्रिय है! बेचारे पेरिस में बैठकर अपनी धरोहरें बचा रहे हैं, और यहां हम उनसे हर दूसरी चीज को सर्टिफिकेट बंटवा रहे हैं।
2. नासा का नया मिशन: अंतरिक्ष में ‘ॐ’ की खोज और शंख की शक्ति
नासा के वैज्ञानिक दिन-रात करोड़ों डॉलर के टेलिस्कोप लेकर केवल यह सुनने की कोशिश कर रहे हैं कि ब्रह्मांड से ‘ॐ’ की आवाज आ रही है या नहीं। व्हाट्सएप के वैज्ञानिकों ने तो यह भी सिद्ध कर दिया है कि अगर आप सुबह उठकर जोर से शंख बजाएंगे, तो कोरोना क्या, साक्षात यमराज भी घबराकर यू-टर्न ले लेंगे। कड़वा सच: नासा वाले अभी भी मंगल ग्रह पर पानी और जीवन ढूंढ रहे हैं, और हमारे व्हाट्सएप ग्रुप के ‘चाचाजी’ पानी से चलने वाली कार का फॉर्मूला कब का खोजकर फॉरवर्ड कर चुके हैं।
3. अंबानी जी का मुफ्त रीचार्ज और ‘लिंक’ का मायाजाल
“मुकेश अंबानी के दादाजी के साले के बेटे की शादी की खुशी में जियो दे रहा है 3 महीने का फ्री रीचार्ज! तुरंत इस लिंक पर क्लिक करें।” इस संदेश के साथ देश के लाखों लोग मुफ्तखोरी की बहती गंगा में हाथ धोने दौड़ पड़ते हैं। हकीकत: इस चमत्कारी लिंक पर क्लिक करने से आपका रीचार्ज तो नहीं होता, लेकिन आपके फोन का सारा डेटा और बैंक अकाउंट का बैलेंस जरूर ‘मुफ्त’ होकर हैकर्स के पास चला जाता है।
तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आपके पास कोई ऐसा संदेश आए जिसे ’11 लोगों को भेजने से शाम तक शुभ समाचार मिलेगा’ लिखा हो, तो उसे तुरंत डिलीट करें। क्योंकि असली शुभ समाचार यही होगा कि आपने अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और समाज को एक और अंधविश्वास से बचा लिया। काक-वाणी का यही संदेश है: अफवाहों को अपनी ‘चोंच’ न दें, बल्कि सच की कसौटी पर कसें!