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शहर का साया एक छोटे से गाँव में रहने वाला आशीष

शहर का साया

एक छोटे से गाँव में रहने वाला आशीष अपने विशाल परिवार के साथ अच्छी तरह से खुश था। लेकिन उसे स्कूल जाने के दिनों से ही शहर में कुछ पानी का चश्मा कहा जाने वाला एक अमीर आदमी से नफरत थी। वह उसके विचारों को समझ नहीं पा रहा था कि एक सामान्य गाँव वाले उस अमीर व्यक्ति से क्यों नफरत करते हैं।

जब आशीष पहले बार शहर गया था तो उसे शहर का बदला हुआ माहौल अच्छा नहीं लगा था और उसे उस चश्मा वाले आदमी से नफ़रत हुई थी। शहर में हमें हमसे बड़े पुरूष होना जरूरी नहीं होता, नतीजतन आशीष के मन में उस शहर के लोगों से ज्यादा उस आदमी से नफरत थी।

उस स्कूल जाने के दिन उसे बड़ी मुश्किल आई, क्योंकि आशीष के दौरा हर बार उस चश्मा वाले आदमी से जाना पड़ता था। लगभग हर दिन उस आदमी को उसे देखना पड़ता था जो अन्यथा उसे भी कोई उसे मिलेगा नहीं था।

धीरे-धीरे आशीष ने उस आदमी से मिलना अच्छा समझना शुरू किया। पहले उसने उससे कुछ बातें की, फिर कुछ ज्ञान लिया और उसके बारे में थोड़ी-सी जानकारी भी प्राप्त की। फिर उस आदमी ने उसे अपने घर बुलाया और अपने घर की तरफ दिखाया। जिस शहर में आशीष को अमीर व्यक्ति से नफरत थी, उसी शहर के बगल में पड़े इस आदमी के यहाँ सभी लोग मित्रवत पड़े हुए थे। आशीष को यह अद्भुत लगा कि उस घर में उसी शहर के लोगों ने अपने आपको एक टमटम दिखाने की कोशिश की है।

आशीष ने इस आदमी को कुछ और चीजें पूछियों तो उस आदमी ने बताया कि वह तनाव में रहने के कुछ घरेलू उपाय कर जिसका नतीजा निहाईत में यह निकला कि उसके घर से तनाव दूर हो गया और वह खुश रहने लगा। तब से वह अपने समाज में लोगों को यह संदेश देने में लगा हुआ है कि उन्हें तनाव से छुटकारा ढूंढने समाज में होना आवश्यक है और समाज में खुशी बाँटने के साथ-साथ तनाव से भी छुटकारा मिल सकता है।

उस शहर में आशीष का साया फैल गया और उसी शहर में उसके लगातार रहने से अब उसे उस चश्मा वाले आदमी से नहीं नफरत है। फिर से स्कूल में जाते समय उसे अब उस आदमी से मिलना अधिक जरूरी लगने लगा। उसे मालूम हो गया कि शहर में सभी लोग दोस्ताना हो सकते हैं और दोस्ती की मिठास को गईब नहीं किया जा सकता है।

धीरे-धीरे हम समझते हैं कि हर व्यक्ति का एक अलग सोच होता है और हमें दूसरों का सोचना से परेशान होना नहीं चाहिए। हमारे समाज में हमें अपने शहर के लोगों के साथ-साथ अन्य समाज के लोगों के साथ भी दोस्ती और अच्छाई का मिश्रण रखना आवश्यक है तभी हम समृद्धि की ओर बढ़ सकते हैं।

कागा जी

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