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भारत में आजादी के बाद

एक जीत

वर्ष 1947 की थी। भारत में आजादी के बाद देश में एक नया उत्साह था। महंगाई कम थी, लोग खुश थे। लेकिन बंगाल नाम की एक महिला के जीवन में उस समय भीषण दु:ख था। उसके पति पुलिस वाला था और उसने इंसानियत के खिलाफ काम करने की शिकायत की थी। पति के इस काम में उसकी बुद्धि लगी थी जो उसे दिला नहीं पा रही थी।

बंगाला भीख मांगते हुए सड़क पर सीधी जगह पर बैठी थी। वह एडवोकेट बनने का सपना देखती थी, कुछ नया करने की इच्छा थी। एक दिन उसकी जिंदगी में बदलाव आया।

बंगाल ने सड़क से कुछ खोखले बक्से लिए और वह अपने गांव जाकर उन्हें उसी चौबारे पर रख दिया जहां वह लगातार बैठती थी। साथ ही वह लोगों को भी उन बक्सों में कुछ न कुछ देते रहती थी। वह समझती थी कि लोग उसे देखते हैं लेकिन उसे इग्नोर कर देते हैं। उसे बहुत दुख होता था, लेकिन उसने अपने आप को उसकी मुसीबत से लड़ना सीख लिया था।

अगले दिन कुछ ऐसा हुआ जो कभी अपने पहले नहीं हुआ था। एक ऊंचे स्थान पर दुत्कार निकला और उसे पता चला कि होनहार वाले लोग उसे देखते नहीं हैं। वह भीखने चली गई थी जैसे कि उसे उसके उसी पसंदीदा चौबारे से कुछ ना मिला हो। बुरी तरह दूसरों से दुख होता है ऐसा उसे फिर महसूस नहीं हुआ।

आसमान में से कुछ खगोलीय वस्तु गिर रही थी। उसने अपना सिर ऊपर उठा कर देखा, जबकि बहुत कम लोगों ने ये खबर सुनी थीं। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है तो उसने गरीब लोगों को यह फोन करके मालूम करने को कहा।

वह कुछ भी नहीं समझ पा रहा था कि क्या हो रहा है। लेकिन फिर एक विचार उसके मन में आया कि वह होनहार लोगों को मदद कर सकती है। उसने रातों रात अपना बच्चों में से एक बेटे का नाम होना हीनाहोता था, मजबूत बनाने का फैसला किया।

उसका प्यार और लागवबदी दिखाकर उसने दूसरे लोगों की मदद करने में उत्सुकता दिखाई। उसने अपने आप को मजबूत बनाकर उसने अपने लक्ष्य को बहुत तेजी से पूरा कर लिया।

बंगाला ने सोचा कि उसने अपने आप को पूरी तरह से बदल लिया है। उसने ना सिर्फ अपने पड़ोसी की मदद की बल्कि अपनी नौकरी में भी बेहतरीन काम किया।

उसे पता लगा कि यदि वह अपने हिस्से की जिम्मेदारी सहेज ले तो आने वाली समय में गरीब लोगों की मदद कर सकती है। उसने अपने इरादे के बारे में लोगों को बताया और उन्हें यह भी बताया कि उसे कैसे सफलता मिली।

बंगाला जीत गई थी और उसने अपने विचार और कार्यों के मद्देनज़र नयी कीमती संपदाओं का जीत हासिल किया। वह अब एडवोकेट बनने की तैयारी कर रही थी और उसे अपने काम और देश के लिए समय समय पर जिम्मेदारियां उठाकर मुश्किल समयों में इंसानियत के लिए लड़ना आसान लगने लगे थे।

उसने अपनी जींदगी में दो बार नयी शुरुआत को हमेशा ही ढूंढा है। एक दिन उसे एक समाज स्वास्थ्य केंद्र में मदद करने के बारे में पता चला। वह वहां जा कर रोज की तरह दूसरों की मदद करती थी। इस तरह समाज के लिए कुछ सहयोग देने में उसे बहुत अधिक सफलता मिली थी।

उसका संचित अभिभावक समाज के लिए उपयोगी होने लगा था और उसे इस बात का भी अहसास होता था कि इन अहम तस्वीरों में कुछ नहीं होता है।

उसने जीत हासिल की। वह अब अपने फैसलों से गरीब लोगों की मदद करती थी और उस दिन के बाद ना कोई उसको देखता था ना कोई उस स्थान पर समय बिताता था, बस उसकी मदद करते यह सकारात्मक ख्याल थे जो उसने अपनी सफलता से पाए थे।

तब से उस दिन से उसने सबको बताया कि हमें अपनी कपड़ों को सुधारने की जगह दूसरों की मदद करनी चाहिए। इसी तरह कई लोग आगे बढ़ते रहे और खुशहाल जीवन जीने लगे।

कागा जी

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