कांव-कांव! भाई साहब, दुनिया के तमाम बड़े मुद्दों को छोड़िए, अल-जज़ीरा ने भारत के सबसे बड़े ‘गृहयुद्ध’ की खोज कर ली है। यह युद्ध किसी सरहद पर नहीं, बल्कि भारतीय घरों की डाइनिंग टेबल पर लड़ा जा रहा है। रिपोर्ट आई है कि ‘जेन जी’ (Gen Z) के बच्चे अपने ‘मोदी-भक्त’ और संघी पिताओं से घर में ही दो-दो हाथ कर रहे हैं। अब तक तो घरेलू क्लेश सिर्फ बहू-सास या भाई-भाई के बीच सुना था, लेकिन अब ‘पापा की शाखा’ और ‘बेटे के स्टारबक्स’ के बीच वैचारिक महायुद्ध छिड़ गया है।
दृश्य की कल्पना कीजिए। सुबह-सुबह पापा ‘योग’ करके और वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से ‘सोने की चिड़िया वाले भारत’ का ज्ञान लेकर चाय की चुस्की ले रहे हैं। तभी सोकर उठते हैं हमारे ‘जेन जी’ सुपुत्र, जो रातभर इंस्टाग्राम पर रील्स देखकर ‘क्रांति’ लाने की तैयारी कर रहे थे। पापा गर्व से कहते हैं, “बेटा, देखा आज मोदी जी ने क्या मास्टरस्ट्रोक खेला है!” और बेटा उधर से ओट-मिल्क की चुस्की लेते हुए आँखें मटकाकर कहता है, “डैड, यू आर गैसलाइटिंग मी! दिस इज सो फासिस्ट!” बेचारे पापा सिर खुजलाते रह जाते हैं कि ये ‘गैसलाइटिंग’ रसोई गैस का सिलेंडर महंगा होने को कहते हैं या कुछ और!
इस युद्ध का असली मैदान है ‘फैमिली वॉट्सऐप ग्रुप’। पापा सुबह-सुबह ‘शुभ प्रभात’ के साथ ‘नेहरू जी की 101 गलतियां’ वाला लंबा-चौड़ा फॉरवर्ड मैसेज भेजते हैं। बेटा तुरंत नीचे किसी वामपंथी पोर्टल का ‘फैक्ट-चेक’ लिंक चिपका देता है। इसके बाद ग्रुप में जो सन्नाटा छाता है, वह भारत-चीन सीमा से भी अधिक तनावपूर्ण होता है। फूफाजी और मौसाजी मूकदर्शक बनकर इस डिजिटल महाभारत का आनंद लेते हैं, जबकि मम्मी बीच-बचाव के लिए ‘आज खाने में क्या बनेगा?’ का पोल डाल देती हैं।
संघर्ष गहरा है। पापा के लिए ‘संघ’ का मतलब है अनुशासन, देशसेवा और सुबह की खाकी हाफ-पेंट (जो अब फुल हो चुकी है)। लेकिन बच्चे के लिए संघ का मतलब है ‘पितृसत्तात्मक वर्चस्व’। पापा सुबह डंडा लेकर शाखा जाते हैं, और बेटा ट्विटर (X) पर ‘कैंसल कल्चर’ का डंडा चलाता है।
‘काक-वाणी’ की तीखी नजर इस बात पर है कि इस युद्ध में अंततः जीत किसकी होगी? फिलहाल तो दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। बेटा भले ही पिता को ‘राइट-विंग’ कहकर कोस ले, लेकिन जब क्रेडिट कार्ड का बिल आता है, तो वह ‘राइट चॉइस’ पापा ही होते हैं। और पापा चाहे देश को जितना भी आत्मनिर्भर बना लें, अपने फोन का वाई-फाई रीस्टार्ट करने के लिए उन्हें इसी ‘जेन जी’ बेटे के आगे हाथ फैलाना पड़ता है।
तो भाई, लोकतंत्र का असली मजा संसद में नहीं, भारतीय ड्राइंग रूम में है। बस दुआ कीजिए कि अगली बार जब पापा ‘अखंड भारत’ का नक्शा दिखाएं, तो बेटा अपने ‘प्रोनाउन्स’ (Pronouns) समझाकर घर से बेदखल न हो जाए! कांव-कांव!
संदर्भ मुख्य समाचार: ‘My father is in RSS’: India’s Gen Z confronts Modi-loving parents at home – Al Jazeera