बॉलीवुड में कदम रखने का सपना देखने वाले हर नवागंतुक के लिए सबसे पहला पड़ाव क्या होता था? सीधे हीरो-हीरोइन बनना? जी नहीं, वह होता था ‘जूनियर आर्टिस्ट’ या बैकग्राउंड क्राउड का हिस्सा बनना। किसी शादी के सीन में ताली बजाना, हीरो की एंट्री पर हूटिंग करना या फिर विलेन की गुंडागर्दी देखकर डरने का नाटक करना। लेकिन काक-वाणी के पाठकों, अब यह ‘पहली सीढ़ी’ ही गायब होने वाली है। जी हां, क्योंकि अब बॉलीवुड में असली इंसानों की जगह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI (Artificial Intelligence) की एंट्री हो चुकी है और यह जूनियर आर्टिस्ट्स का काम छीन रही है।
भीड़ गायब, अब कंप्यूटर बाबा का राज!
हाल ही में ‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट ने फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में सनसनी फैला दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अब फिल्मों में बड़ी-बड़ी भीड़ दिखाने के लिए सैकड़ों जूनियर आर्टिस्ट्स को बुलाने, उन्हें रोज का मेहनताना देने और उनके खाने-पीने का इंतजाम करने की जरूरत नहीं रह गई है। डायरेक्टर साहब अब बस कंप्यूटर पर कुछ जादुई क्लिक करते हैं और हजारों की ‘डिजिटल भीड़’ स्क्रीन पर नाचती-गाती और चिल्लाती नजर आने लगती है। फिल्म निर्माताओं के लिए यह तकनीक बजट बचाने का सबसे तगड़ा नुस्खा साबित हो रही है।
‘स्ट्रगल’ का पहला कदम ही हो गया डिजिटल
बॉलीवुड में संघर्ष (Struggle) की सबसे हसीन कहानियां अक्सर ‘भीड़ के एक गुमनाम चेहरे’ से ही शुरू होती हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजपाल यादव और मिथुन चक्रवर्ती जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी कभी बैकग्राउंड आर्टिस्ट के तौर पर ही कैमरे का सामना किया था। लेकिन अब AI की वजह से यह पहला कदम ही डिजिटल हो गया है। नई तकनीक के तहत, अब एक जूनियर आर्टिस्ट को बुलाकर उसका 3D स्कैन ले लिया जाता है। इसके बाद AI सॉफ्टवेयर उस एक चेहरे के हजारों क्लोन बनाकर पूरी फिल्म में इस्तेमाल कर लेता है। यानी काम एक को मिला और बाकी सैकड़ों बेचारे घर बैठ गए!
रोटी-रोजी पर संकट या सिनेमा का नया युग?
इसमें कोई शक नहीं कि तकनीक ने निर्माताओं के करोड़ों रुपये बचाए हैं। न तो शूटिंग के लिए भारी-भरकम भीड़ संभालने का झंझट और न ही सुरक्षा की चिंता। लेकिन काक-वाणी का मानना है कि इस ‘तकनीकी चमक’ के पीछे सैकड़ों जूनियर आर्टिस्ट्स के घरों की रसोई ठंडी होने का दर्द भी छिपा है। जूनियर आर्टिस्ट्स एसोसिएशन अब इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जता रही है। हॉलीवुड में तो इसके खिलाफ हड़ताल भी हो चुकी है, और अब यह आग बॉलीवुड तक पहुंच गई है। देखना दिलचस्प होगा कि भावना प्रधान रहने वाला हमारा बॉलीवुड इस मशीनी बदलाव को कैसे अपनाता है!
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