सुरजीत भल्ला का दिव्य चश्मा: जब GDP के ‘डाटा’ में दिखा सिर्फ और सिर्फ ‘सत्य’!

वाह! क्या बात है। देश के महान अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला जी ने हमारे ज्ञान चक्षु खोल दिए हैं। उन्होंने साफ-साफ कह दिया है कि भारत के जीडीपी (GDP) आंकड़ों में “रत्ती भर भी राजनीति” नहीं है। अब भला भल्ला साहब झूठ क्यों बोलेंगे? आखिर सरकारी आंकड़ों पर शक करना तो आज के समय में सीधे-सीधे देशद्रोह की श्रेणी में आता है, है कि नहीं? उनके इस बयान के बाद हमारे मन का सारा संदेह वैसे ही कपूर हो गया, जैसे चुनाव खत्म होते ही जनता के अच्छे दिन गायब हो जाते हैं।

डाटा चमकाने की जादुई कला

हम साधारण मनुष्यों को लगता था कि जब बेरोजगारी चरम पर हो, महंगाई आसमान छू रही हो, और आम आदमी की जेब खाली हो, तो जीडीपी का कुलांचे मारना थोड़ा अजीब है। लेकिन भल्ला जी ने समझाया कि आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते, बस उन्हें देखने के लिए भाजपा सरकार समर्थित विशेष चश्मे की जरूरत होती है। विपक्ष भले ही चिल्लाता रहे कि आंकड़ों से छेड़छाड़ की गई है, लेकिन सच तो यह है कि यह ‘छेड़छाड़’ नहीं, बल्कि ‘सौंदर्य प्रसाधन’ (मेकअप) है। आखिर हमारी सरकार अपने आंकड़ों को बिना मेकअप के दुनिया के सामने कैसे ला सकती है? आंकड़ों की गरिमा बनाए रखना भी तो एक कला है!

वैसे भी, हमारे देश में अर्थशास्त्र अब सिर्फ गणित नहीं रह गया है, यह एक ‘पवित्र कला’ बन चुका है। इस कला में महारत हासिल करने वाले जादूगर आंकड़ों को इस तरह घुमाते हैं कि मंदी भी ‘तेजी की तैयारी’ दिखाई देने लगती है। सुरजीत भल्ला जी जैसे दिग्गज इस कला के ‘द्रोणाचार्य’ हैं, जो अर्जुन की तरह केवल जीडीपी की आंख (यानी सिर्फ सकारात्मक आंकड़ों) को ही देखते हैं, बाकी बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था तो उनके लिए बस ‘बैकग्राउंड नॉइज़’ है।

गरीब की थाली और जीडीपी का गणित

भल्ला जी के अनुसार, जो लोग जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं, वे दरअसल देश की प्रगति से जलते हैं। अब बताइए, अगर आपकी थाली से दाल गायब है, तो क्या हुआ? आंकड़े तो बता रहे हैं कि देश में दाल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हुआ है! आप भूखे हैं तो यह आपकी व्यक्तिगत समस्या है, राष्ट्रीय स्तर पर तो हम सब छप्पन भोग खा रहे हैं। अर्थशास्त्र का यही नियम है—यदि जेब खाली हो, तो सरकारी आंकड़ों की किताब पढ़कर पेट भर लेना चाहिए।

‘काक-वाणी’ का मानना है कि भल्ला साहब को इस ‘परम सत्य’ की खोज के लिए तुरंत किसी बड़े पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए। उन्होंने साबित कर दिया है कि भारत में डेटा उतना ही शुद्ध है जितना कि चुनावी वादे। अब से जब भी आपको महंगाई का झटका लगे, तो आंखें बंद कीजिए, भल्ला जी का चेहरा याद कीजिए और जोर से कहिए—”डाटा में कोई राजनीति नहीं है!” जय हो सरकारी आंकड़ों की!


संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें

कागा जी