100 दिन पहले टिकट बुक? क्यों हॉलीवुड की इस चाल से कोसों दूर है हमारा बॉलीवुड!

हॉलीवुड की जब कोई बड़ी फिल्म जैसे मार्वल या ‘अवतार’ आने वाली होती है, तो विदेशी दर्शक 100 दिन पहले ही अपनी पॉपकॉर्न और सीट बुक करके बैठ जाते हैं। लेकिन जब बात हमारे चहेते बॉलीवुड की आती है, तो स्थिति बिल्कुल अलग होती है। यहाँ तो शुक्रवार को फिल्म रिलीज होनी होती है और बुधवार की शाम तक बुकिंग साइट्स पर ‘बुकिंग जल्द खुलेगी’ का बोर्ड टंगा रहता है। आखिर ऐसा क्यों है कि भारतीय सिनेमा हॉलीवुड के इस 100-दिन वाले एडवांस बुकिंग मॉडल की नकल नहीं कर पा रहा है? काक-वाणी के इस खास विश्लेषण में आइए समझते हैं पर्दे के पीछे का पूरा माजरा!

1. ‘रिलीज डेट’ का कोई पक्का ठिकाना नहीं!

बॉलीवुड में जब तक फिल्म बड़े पर्दे पर आ न जाए, तब तक उसकी रिलीज डेट को पत्थर की लकीर मानना खतरे से खाली नहीं है। कभी वीएफएक्स का काम अधूरा रह जाता है, तो कभी बड़े स्टार्स की शूटिंग लटक जाती है। कई बार तो किसी दूसरी बड़ी फिल्म से क्लैश के डर से रातों-रात तारीख बदल दी जाती है। जब मेकर्स को खुद अपनी रिलीज डेट पर पूरा भरोसा नहीं होता, तो भला वे 100 दिन पहले टिकट कैसे बेच सकते हैं?

2. सेंसर बोर्ड का ‘लास्ट मिनट’ वाला सस्पेंस

भारतीय सिनेमा का एक कड़वा सच यह भी है कि यहाँ फिल्मों को सेंसर बोर्ड (CBFC) का सर्टिफिकेट अक्सर रिलीज से बस 4-5 दिन पहले ही मिल पाता है। कई बार कट्स, बदलावों या विवादों के कारण काम बिल्कुल अंतिम समय तक खींचता है। जब तक हाथ में लीगल सर्टिफिकेट न आ जाए, तब तक थिएटर्स और मेकर्स एडवांस बुकिंग चालू करने का रिस्क नहीं लेना चाहते।

3. थिएटर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स का ‘दंगल’

हॉलीवुड में स्टूडियोज और थिएटर चेन्स के बीच नियम और शर्तें बहुत पहले तय हो जाती हैं। लेकिन भारत में? यहाँ सिंगल स्क्रीन, मल्टीप्लेक्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच स्क्रीन शेयरिंग और शो टाइमिंग्स को लेकर रिलीज वाले हफ्ते के बुधवार तक खींचतान चलती रहती है। जब यही तय न हो कि फिल्म किस थिएटर में कितने शो चलाएगी, तो सिस्टम पर टिकट बिकना नामुमकिन है।

4. हमारे दर्शकों का ‘ऑन द स्पॉट’ वाला मिजाज

भारतीय दर्शक स्वभाव से काफी स्पॉन्टेनियस होते हैं। 100 दिन बाद कौन सी फिल्म देखनी है, इसका प्लान हमारे यहाँ तीन महीने पहले नहीं बनता। यहाँ तो ट्रेलर के बज, गानों की दीवानगी और गुरुवार रात के दोस्तों के मूड पर प्लान बनता है। मेकर्स भी जानते हैं कि भारत में 100 दिन की बुकिंग से ज्यादा ‘माउथ पब्लिसिटी’ और ‘स्पॉट बुकिंग’ का राज चलता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर कहें तो, बॉलीवुड का पूरा ताना-बाना थोड़े रोमांच, थोड़ा सस्पेंस और बहुत सारे जुगाड़ पर टिका है। जब तक यहाँ के डिस्ट्रीब्यूशन और सर्टिफिकेशन सिस्टम में पेशेवर बदलाव नहीं आते, तब तक 100 दिन पहले बुकिंग का सपना दूर ही रहेगा। तब तक आप भी गुरुवार की रात को ही ऐप रिफ्रेश करने का मज़ा लीजिए!


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कागा जी