0

नन्हीं सी चिड़िया

Story Title: नन्हीं सी चिड़िया

जंगल में जहाँ फैली शान्ति सदा बरकरार रहती थी, वहाँ नन्ही सी चिड़िया सबसे प्यारी थी। वह शांतिप्रिय जंगल का सबसे सुंदर – सा पक्षी था। हर कोई उससे खुश रहता था। पर नन्ही सी चिड़िया सभी से आलोचना से बचती थी। वह जानती थी कि नकारात्मकता हमेशा कुछ नहीं देती, बल्कि सिर्फ अलग कर देती है। इसलिए उससे आलोचना करने वाले पक्षियों के बारे में वह कुछ नहीं कहती थी।

एक दिन नन्ही सी चिड़िया ने नयी चिड़ियों के आने का दीदार किया। उसे लगा कि ये आकर उसे थोड़ा आलोचनामय भाव दिखाने वाले पक्षियों में से होंगे। वह चिंतित हो गयी थी।

चिड़ियों के आने का समाचार वह सबसे पहले सुना था। पर उसने ध्यान नहीं दिया था कि वह अब नयी होकर ही पहले बार जाठे थी। वह विचलित हो गयी थी। इस से पहले तो सभी पक्षियों ने मेरे प्रति तोहफे भेंट करते हुए हास्यास्पद वार्ताओं को हलके में लेते थे। ना क्या मूर्ख मूर्ख बातें कहते थे।

तभी आसमान में उसने एक वैभव भरा पक्षी नाचते हुए देखा। नन्ही सी चिड़िया ने उसे नजदीक से देखा तो पता चला कि ये एक मोर है। नन्ही सी चिड़िया ने सोचा कि मोर एक भव्य और बहुमूल्य पक्षी हैं, लोग इस घमंडी और हमेशा हाव-भावें वाले पक्षी को देखकर दोष लगाते हैं। पर इस पक्षी मोर में आलस नहीं है। हालांकि मोर अपने अभिव्यक्ति तथा स्वंभाव को ऊंट खड़े करने का चुनाव करते हैं, पर तब भी वे प्रकृति के साथ समझौता करना सीखते हैं।

उसी दिन से नन्ही सी चिड़िया ने मोर से सीखा कि यदि आप शांति और सुख को खोजते हैं, तो वे सहज रूप से आपके सामने होंगे। अक्सर हम अपने आसपास निराशाजनकस्वरों को सुनते हुए, पत्रकारों की समाचारों में खोये हुए होते हैं। बचपन में नन्ही सी चिड़िया ने कई बार एक नए अस्तित्व को जीतने के सपने देखे होंगे, और उनके लिए वह उपलब्ध चुनौतियों का सामना करती रही। यह सीखने के बाद वह मंत्रिमंडल से बनी महीन से महीन नव अधिसूचनाएं-मंत्री हो गई। उसका दृढ़ संकल्प और प्रयोगिता अंततः उस पक्षी को सफलता दिला दी।

फिर एक ऐसा मौसम आया, जिसमें अधिकांश पक्षियों के शरीर में नीचे जमा जोखिमों को ढककर रखने के लिए पर्याप्त वसा जुटाने की जरूरत होती है। शूकर, मोर, अंड़ों पर चढ़ने वाले पक्षी, मछली- हर कोई उन झटकों का इंतजार करने लगा था जो आने वाले समय में आने वाले हैं। मोरों के सभी झटके, चहचहाहटों, नाच-गान के बजाय, आकाश से गंभीरता कायम रखने में एक भव्यता थी। उनकी अंग्रेजी शैली, उनकी सशक्त कल्पनाशीलता, और उनका कपट आकाश से लगा रहता था। पर वे नहीं जानते थे कि एक नन्ही सी चिड़िया उनसे कहीं बेहतर हो सकती है।

वह नन्ही सी चिड़िया, जो अपने आप को निराशाजनक वातावरण से मुक्त करके हमेशा अपनी जिम्मेदारियों के सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित करती रहती थी, हमेशा नए-नए उद्यमों की ओर निगाह डालती रहती थी। नन्ही सी चिड़िया जीत की तलाश में विशेष रूप से रचनात्मकता का उपयोग करती थी। वह नई-नई तकनीकों की खोज करती थी ताकि वह अपनी मूल भूमिका से हमेशा ऊपर उठ सके। इस प्रकार उनके प्रयासों ने उन्हें जीत के ओसर पर ले जाकर एक नया दौर खोला जिसमें लक्ष्यों और शिखरों को हासिल करने का सफ़र शुरू हुआ।

वेरोनिका नी चटर्जी ने अपनी किताब में लिखा है कि “हर व्यक्ति एक चुनौती का सामना करता है, एक समस्या का सामना करता है। वह परख भी करता है कि इसके उत्तर सिर्फ उसी के पास होंगे, उसे तय करने के लिए कि उसे अपनी स्वभाव तथा जीवन के साथ अपना रिश्ता पुनः विचार करना होगा।”

जो कुछ भी हो, हमें हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को समझने की जरूरत होती है। यह उदाहरण बताता है कि अज्ञात, धन, शौक और चमकदार सामग्री आपको केवल एक बात नहीं देती है, जीतने वाली शक्ति। नीचे मौजूद शक्ति, धैर्य और सहयोग की अपेक्षा भी समझना चाहिए। हमेशा निराशाजनकता से दूर रहें और जीवन के प्रत्येक मद में जीत प्राप्त करना जारी रखें। जब तक आपकी फिजिकल क्षमता संपन्न नहीं होती, तब तक आप जीतने वाले नहीं हो सकते। सो जीतने की तैयारी में लग जाईये।

कागा जी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *