Title: रात का विश्वास (A Trust in the Night)
इस कहानी का नाम है “रात का विश्वास”. यह कहानी एक आदमी के विश्वास की है, जो एक रात को गुम हो गया था और अपने विश्वास को खोने से बचाने का सामना कर रहा था।
एक आदमी एक दिन अपनी नौकरी के लिए गांव से उद्योग नगरी के लिए यात्रा कर रहा था। उसकी शाम को वापसी की ट्रेन थी लेकिन जब ट्रेन आई तो उसका घर का साड़ा पास नहीं हुआ। आदमी को विश्वास हो गया कि कोई न कोई नकारात्मक हो गया है। वो बच्चों के टूटे हुए खिलौने को देखता हुआ मान गया कि उसका सब सामान चोरी हो गया है।
गांव के लिए अगली ट्रेन एक घंटा बाद थी इसलिए आदमी का विकल्प था कि उसे रातभर वहाँ ही थहरना पड़ेगा। उसे एक ठोड़े से खाली जगह मिल जाती है जिसे उसने अपना घर बना लिया।
आदमी को थकान महसूस होने लगी लेकिन वो विचार करता रहा कि वो क्या करेगा अगले दिन सब सामान न मिलने पर। फिर लगा अच्छा है की मेरे पास कुछ पैसे होते जिनसे में खाना खरीद सकता हूँ। उसने जेब में अपने इकट्ठे किए पैसों की गिनती करना शुरू कर ली।
तभी उसने नजर से एक आदमी को पाया जो उसके सामने खड़े थे। यह आदमी थोड़ी सी उमर का था और सामान्य सा लग रहा था। लेकिन वो इतने बेचैन नहीं था। उसने आदमी के सामने एक दूध की पेटी रख दी और बता दिया कि “ये दूध आपके लिए है। मैंने देखा कि आप कुछ खरीद नहीं पा रहे हैं तो मैंने सोचा कि आपको ऊपर से ठंड से बचने के लिए कुछ चाय या दूध देनी चाहिए।”
आदमी को समझ नहीं आ रहा था कि कौन यथार्थ में उसके लिए दूध लेकर आ गया था। वो पूछने लगा कि तुमने मुझे पहचाना कैसे। तो वो बताते हुए कि उन्होंने उसे ट्रेन में देखा था जब उसने अपने पैसों की गिनती शुरू की थी।
वो अपने विश्वास में से गिरते नहीं थे। उन्होंने पी लिया था और दूध की जगह उसे एक अनुभूति दी। उसे अनुभूति हुई कि वास्तव में कुछ लोग अभी भी अच्छे होते हैं।
रात बीतती गई और आदमी नींद में ये अनुभवों से पूर्णता प्राप्त हुआ। सुबह जब उसने अपनी फ्लाइंग जैकेट उतारी तो उसके सभी पैसे वापस मिल गए। अब वो जानता था कि उसने अपनी जगह सही चुनी थी। उस व्यक्ति ने मानव जाति और विश्वास में जो उन्होंने लगाव रखा था, के लिए उस आदमी के लिए एक नया जीवन दिया।