व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के वो ‘परम सच’, जिन्हें सुनकर खुद विज्ञान भी कोमा में चला जाए!

परम ज्ञानी और उनके बिना सेंसर वाले संदेश

नमस्कार पाठकों! ‘काक-वाणी’ के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ विभाग में आपका स्वागत है। हमारे चारों ओर ज्ञान की ऐसी गंगा बह रही है, जिसमें यदि आप एक बार डुबकी लगा लें, तो विज्ञान, भूगोल और इतिहास सब धराशायी हो जाएंगे। इस यूनिवर्सिटी के डीन, प्रोफेसर और वाइस-चांसलर हमारे वही फूफाजी और मौसाजी हैं, जो सुबह उठते ही ‘गुड मॉर्निंग’ के साथ यूनेस्को का एक नया फरमान हमारे इनबॉक्स में फेंक मारते हैं। आइए, आज कुछ ऐसे ही वायरल ‘सत्यों’ की धज्जियां उड़ाते हैं।

यूनेस्को का पसंदीदा खेल: भारतीय चीजों को ‘बेस्ट’ घोषित करना

क्या आपने सुना है? यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है! यह खबर पिछले दस सालों से हर साल वायरल होती है। बेचारा यूनेस्को पेरिस में बैठकर सोचता होगा कि आखिर उसने कब और किस फुर्सत के पल में यह सर्टिफिकेट बांटा था? लेकिन हमारे व्हाट्सएप वीरों को इससे क्या! उनके लिए तो यूनेस्को एक ऐसी संस्था है जिसका एकमात्र काम भारतीय राष्ट्रगान, तिरंगे या हमारे प्रधानमंत्रियों को दुनिया में ‘सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करना है। सच यह है कि यूनेस्को ऐसा कोई कॉम्पिटिशन आयोजित ही नहीं करता।

चमत्कारी मैसेज: फॉरवर्ड करो और अमीर बन जाओ

एक और अद्भुत वैज्ञानिक शोध जो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के विद्वानों ने किया है—”इस संदेश को तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक कोई शुभ समाचार मिलेगा। न भेजने वाले का मोबाइल ब्लास्ट हो गया!” गजब का ऑटोमेशन है भाई! गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च करके सॉफ्टवेयर बनाती हैं, और यहाँ व्हाट्सएप के एक फॉरवर्ड से लोगों की तकदीरें बदल रही हैं। अगर ऐसा होता, तो देश की गरीबी केवल दो-चार फॉरवर्ड्स में ही खत्म हो जाती। सच यह है कि यह केवल अंधविश्वास फैलाने का जरिया है।

नासा की नई खोज: ब्रह्मांड में गूंजता ‘ॐ’

नासा के वैज्ञानिकों ने दिन-रात एक करके स्पेस में टेलिस्कोप लगाया और उन्हें सूर्य से ‘ॐ’ की आवाज सुनाई दी। नासा वाले खुद हैरान हैं कि उनके स्पेसक्राफ्ट में जो आवाज रिकॉर्ड हुई, वो उनके हेडक्वार्टर से ज्यादा हमारे व्हाट्सएप ग्रुप्स में साफ सुनाई दे रही है। सच तो यह है कि नासा वालों को खुद नहीं पता कि वे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के कितने बड़े कर्जदार हैं, जो उनके नाम पर रोज नई खोजें पेटेंट करवा देते हैं।

काक-वाणी का ज्ञानपत्र

तो प्यारे छात्रों, अगली बार जब आपके पास कोई ऐसा संदेश आए जिसमें “नासा”, “यूनेस्को” या “चमत्कार” जैसे शब्दों का इस्तेमाल हो, तो अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, न कि उंगलियों का। हर पीली दिखने वाली चीज सोना नहीं होती और हर व्हाट्सएप फॉरवर्ड सच नहीं होता। फॉरवर्ड का बटन दबाने से पहले जरा फैक्ट-चेक कर लें, वरना इस यूनिवर्सिटी की डिग्री तो मिल जाएगी, लेकिन अक्ल हमेशा के लिए ‘सस्पेंड’ हो जाएगी।

कागा जी