वाह! क्या बात है। हमारे देश की राजनीति इतनी कोमल और संवेदनशील हो चुकी है कि अब नेताओं के कान ‘टच मी नॉट’ (छुईमुई) के पौधे की तरह व्यवहार करने लगे हैं। ताजा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘कल्चर शॉक’ (सांस्कृतिक सदमे) और उस पर राहुल गांधी के जवाबी हमले का है। वाकया यह है कि सीजेपी (CJP) प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कुछ ऐसे कड़े और तीखे शब्द कह दिए, जिन्हें सुनकर हमारे प्रधानसेवक की कोमल भावनाएं आहत हो गईं। अब इस नाजुकता पर राहुल गांधी ने सवाल दाग दिया है, जिससे राजनीति का तापमान फिर से बढ़ गया है।
संस्कृति का ‘शॉक’ और संस्कारी कान
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी, जो दशकों से चुनावी रैलियों में विपक्षियों के लिए ‘शूर्पणखा’, ‘कांग्रेस की विधवा’ और ’50 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ जैसे अत्यंत ‘सभ्य’ और ‘सांस्कृतिक’ विशेषणों का प्रयोग सुनते और करते आए हैं, अचानक एक प्रदर्शन में महिलाओं के मुंह से कुछ अपशब्द सुनकर ‘कल्चर शॉक’ में चले गए। काक-वाणी को तो डर है कि कहीं इस भारी सदमे के इलाज के लिए उन्हें केदारनाथ की गुफा में फिर से ध्यान न लगाना पड़ जाए। आखिर एक राजनेता, जो दशकों से भारतीय राजनीति के कीचड़ में कमल खिलाने का दावा करता आया है, वह एकाएक इतना नाजुक कैसे हो गया कि उसे प्रदर्शनकारियों के शब्दों से शॉक लगने लगा?
राहुल गांधी की ‘डिक्शनरी’ और नया बवाल
इधर हमारे कांग्रेस के जननायक राहुल गांधी भी कहां चुप रहने वाले थे। उन्होंने तुरंत प्रधानमंत्री जी के इस ‘शॉक’ की थेरेपी शुरू कर दी। राहुल जी का कहना है कि जब देश में बेरोजगारी, महंगाई और मणिपुर जैसे गंभीर मुद्दों पर जनता चीख रही होती है, तब प्रधानमंत्री जी के कान ‘नोइज़ कैंसिलेशन’ मोड पर चले जाते हैं। लेकिन जैसे ही किसी प्रदर्शन में किसी पीड़ित महिला के मुंह से कोई कड़वा शब्द निकलता है, प्रधानमंत्री जी का ‘संस्कृति रडार’ तुरंत एक्टिव हो जाता है। राहुल गांधी का यह सवाल वाकई विचारणीय है कि ‘सभ्यता और मर्यादा’ का पाठ सिर्फ सत्ता के विरोधियों को ही क्यों पढ़ाया जाता है?
काक-वाणी की अंतिम ‘कांव-कांव’
अंत में, काक-वाणी यही कहेगी कि भारतीय राजनीति में ‘गाली’ और ‘बोली’ का रिश्ता चोली-दामन का है। जब अपनी तरफ के नेता संसद में असंसदीय भाषा का उपयोग करते हैं, तब वह ‘राष्ट्रभक्ति का जोश’ कहलाता है, लेकिन जब जनता हताशा में चीखती है, तो वह ‘कल्चर शॉक’ बन जाता है। प्रधानमंत्री जी का ‘शॉक’ होना और राहुल गांधी का उस ‘शॉक’ पर सवाल उठाना, दोनों ही इस महान लोकतंत्र की नौटंकी के दो बेहतरीन दृश्य हैं। जनता तो बस यह सोच रही है कि काश! जितनी जल्दी इन नेताओं को एक-दूसरे के बयानों से ‘शॉक’ लगता है, उतनी ही जल्दी देश की असली समस्याओं पर भी इन्हें थोड़ा ‘करंट’ लग जाता!
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