सुबह की पहली किरण के साथ जब चाय का प्याला आपके होठों को छूता है, ठीक उसी वक्त आपके फोन की घंटी बजती है। स्क्रीन पर चमकता है—”यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है, तुरंत 11 लोगों को भेजें और चमत्कार देखें!” बधाई हो, आप “वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी” के दीक्षांत समारोह में बिना कोई परीक्षा दिए सीधे टॉपर बन चुके हैं।
ज्ञान का असीमित महासागर: हमारी फॉरवर्ड आर्मी
इस अद्भुत विश्वविद्यालय के कुलपति हमारे सम्मानीय ‘फूफा जी’ और ‘मौसा जी’ हैं, जो सुबह-सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ के फूलों के साथ देश और दुनिया को बचाने का अचूक नुस्खा भेजते हैं। यहाँ अल्बर्ट आइंस्टीन रोज आकर गीता के श्लोक सुनाते हैं और नासा वाले अंतरिक्ष से सीधे ‘ॐ’ की ध्वनि रिकॉर्ड करके हमारे फैमिली ग्रुप में भेज देते हैं। आधुनिक विज्ञान बेचारा कोने में बैठकर आंसू बहा रहा है, क्योंकि उसे पता ही नहीं था कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज तो कब का हमारी रसोई में रखे अदरक और लहसुन के चमत्कारी काढ़े में छुपा हुआ था।
सत्यता की कसौटी: ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’
इस डिजिटल विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी डिग्री है—”फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स” का टैग। जिस संदेश पर यह टैग लग गया, वह सत्य की हर कसौटी पर खुद-ब-खुद खरा उतर चुका है। फिर चाहे वह यह दावा हो कि “2000 के नोट में नैनो जीपीएस चिप लगी है जो पाताल से भी पैसे ढूंढ निकालेगी” या फिर “इस लाल बटन को दबाने से आपका फोन फ्रिज बन जाएगा”। लोग बिना पलक झपकाए इन दावों को सच मान लेते हैं क्योंकि इंटरनेट पर बैठी दुनिया तो नादान है, असली खोजी पत्रकारिता तो शर्मा जी का लड़का कर रहा है जो सीधे ‘सीक्रेट सोर्स’ से खबरें लाता है।
काक-वाणी की कड़वी सलाह: फॉरवर्ड करना बंद करो
काक-वाणी की कड़वी सच्चाई यही है कि ज्ञान बांटने से बढ़ता है, लेकिन वॉट्सऐप का ‘अज्ञान’ बांटने से सिर्फ समाज का मानसिक संतुलन बिगड़ता है। अगली बार जब आपके पास कोई ऐसा दावा आए जिसमें नासा, यूनेस्को या किसी अदृश्य जापानी वैज्ञानिक का हवाला दिया गया हो, तो अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें। हर वायरल होने वाली बात सच नहीं होती। थोड़ा गूगल करें, फैक्ट चेक करें, वरना आप इस डिजिटल यूनिवर्सिटी के आजीवन ‘मूर्ख’ मानद सदस्य बने रहेंगे और दुनिया आप पर हंसती रहेगी।