जब भी कोई भारतीय राजनेता उज्बेकिस्तान की धरती पर कदम रखता है, तो दिमाग में कूटनीति से ज्यादा बॉलीवुड का संगीत बजने लगता है! जी हां, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ने दोनों देशों के बीच के गहरे सांस्कृतिक संबंधों को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन ‘काक-वाणी’ के हमारे चश्मे से देखें, तो यह रिश्ता सिर्फ व्यापार या समझौतों का नहीं, बल्कि शुद्ध बॉलीवुडिया रोमांस, ड्रामा और डिस्को का है!
उज्बेकिस्तान में राज कपूर का जादू आज भी है बरकरार
अगर आप सोचते हैं कि उज्बेकिस्तान में सिर्फ भारतीय कूटनीति का सिक्का चलता है, तो आप बिल्कुल गलत हैं। वहां के लोगों के दिलों पर सालों से हिंदी सिनेमा के शो-मैन Raj Kapoor का राज है। उज्बेक लोगों के लिए ‘आवारा हूं’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि एक बेहद खूबसूरत एहसास है। जब सोवियत संघ के जमाने में राज कपूर ताशकंद गए थे, तो लोगों ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया था। आज भी ताशकंद की सड़कों पर अगर कोई भारतीय दिख जाए, तो स्थानीय लोग मुस्कुराकर गुनगुनाने लगते हैं- “आवारा हूं…”। पीएम मोदी की यह यात्रा इसी पुराने और अटूट रिश्ते को एक नया आयाम देती है।
मिथुन दा का ‘जिमी जिमी’ और उज्बेक फैंस का डांस
राज कपूर के बाद अगर किसी ने उज्बेकिस्तान को अपनी उंगलियों पर नचाया, तो वो थे हमारे डिस्को डांसर मिथुन चक्रवर्ती। मिथुन दा का गाना ‘जिमी जिमी आजा आजा’ आज भी उज्बेकिस्तान की शादियों और पार्टियों की जान है। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान जब सांस्कृतिक आदान-प्रदान की बात हुई, तो पर्दे के पीछे छिपी यह फिल्मी दीवानगी साफ नजर आई। दोनों देशों के बीच का यह सिनेमाई कनेक्शन इतना मजबूत है कि वहां की युवा पीढ़ी भी हिंदी फिल्मों के डायलॉग्स बखूबी बोल लेती है।
‘काक-वाणी’ का नजरिया: सिनेमा से बड़ा कोई पुल नहीं!
पीएम मोदी की इस यात्रा ने भले ही द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया हो, लेकिन हमारे लिए असली कूटनीति तो बॉलीवुड के गानों और फिल्मों के जरिए ही होती है। जब तक उज्बेकिस्तान की वादियों में राज कपूर और मिथुन चक्रवर्ती के गाने गूंजते रहेंगे, तब तक भारत और उज्बेकिस्तान की दोस्ती अमर रहेगी। तो दोस्तों, इस यात्रा से राजनीतिक फायदे जो होंगे वो तो होंगे ही, लेकिन हमारे लिए गर्व की बात यही है कि सात समंदर पार भी हमारा बॉलीवुड सीना ताने खड़ा है!
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