बॉलीवुड की ‘डिंपल गर्ल’ यानी हमारी प्यारी प्रीति जिंटा इन दिनों भले ही रुपहले पर्दे से थोड़ी दूर हों, लेकिन वह लाइमलाइट में बने रहना अच्छे से जानती हैं। लॉस एंजिल्स में अपने पति जीन गुडइनफ और बच्चों के साथ रह रहीं प्रीति ने हाल ही में एनआरआई (NRIs) को लेकर एक बेहद दिलचस्प बयान दिया है, जो आजकल टॉक ऑफ द टाउन बना हुआ है। ‘काक-वाणी’ के इस चटपटे बुलेटिन में आज हम इसी मुद्दे पर बात करने वाले हैं।
विदेश जाकर जागती है असली ‘भारतीयता’? प्रीति का बड़ा दावा
प्रीति जिंटा का मानना है कि जो भारतीय विदेश में जाकर बस जाते हैं, वे भारत में रहने वाले लोगों की तुलना में अपनी संस्कृति और जड़ों से ज्यादा मजबूती से जुड़ जाते हैं। एक हालिया इंटरव्यू में प्रीति ने कहा, “जब आप अपने देश से दूर होते हैं, तो आप उस ‘इंडियन-नेस’ यानी भारतीयता को और ज्यादा शिद्दत से तलाशते हैं। एनआरआई लोग हमेशा अपने वतन की खुशबू और उस देसी अहसास को ढूंढते रहते हैं।”
प्रीति की यह बात बिल्कुल सोलह आने सच लगती है! भारत में रहते हुए हम भले ही वेस्टर्न म्यूजिक और पिज्जा-बर्गर के दीवाने बने फिरते हैं, लेकिन जैसे ही पैर सात समंदर पार पड़ते हैं, वैसे ही दिल में दबा ‘देसी छोरा’ बाहर आ जाता है। विदेश जाते ही अचानक हमें कढ़ी-चावल की याद सताने लगती है और कानों में ‘लॉलीपॉप लागेलू’ जैसे गाने अमृत की तरह रस घोलने लगते हैं!
लॉस एंजिल्स में देसी ठाठ-बाठ!
खुद प्रीति जिंटा भी इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं। लॉस एंजिल्स में रहते हुए भी वह होली, दिवाली और करवा चौथ जैसे त्योहारों को जिस पारंपरिक अंदाज में मनाती हैं, उसे देखकर अच्छे-अच्छे देसी भी हैरान रह जाएं। प्रीति का मानना है कि वतन से दूरी ही वह वजह है जो लोगों को अपनी संस्कृति को और ज्यादा संजोकर रखने के लिए मजबूर करती है।
चाहे बच्चों को हिंदी सिखाना हो या फिर संडे को घर पर परांठे बनाना, एनआरआई लोग अपनी पहचान बनाए रखने के लिए दोगुना प्रयास करते हैं। तो दोस्तों, प्रीति जिंटा की इस बात से आप कितने सहमत हैं? क्या वाकई ‘दूरियां नजदीकियां बढ़ा देती हैं’? अपनी राय हमारे साथ जरूर साझा करें और बॉलीवुड के ऐसे ही मजेदार किस्सों के लिए जुड़े रहिए ‘काक-वाणी’ के साथ!</p
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