बॉलीवुड की ‘डिंपल गर्ल’ यानी हमारी प्यारी प्रीति जिंटा इन दिनों भले ही बड़े पर्दे से थोड़ी दूर हों, लेकिन अपनी बेबाक और दिल जीतने वाली बातों से वो हमेशा चर्चा में बनी रहती हैं। हाल ही में प्रीति ने सात समंदर पार रहने वाले भारतीयों यानी एनआरआई (NRIs) को लेकर एक ऐसा बयान दे डाला है, जिसे सुनकर हर उस भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा जो देश से बाहर रहता है। प्रीति का मानना है कि जो लोग देश से बाहर जाते हैं, उनका ‘देसी दिल’ कुछ ज्यादा ही जोर से धड़कने लगता है!
विदेश जाते ही क्यों याद आता है अपना देसीपन?
एक इंटरव्यू के दौरान बात करते हुए प्रीति जिंटा ने कहा कि जब भारतीय विदेश जाते हैं, तो वे अपनी पहचान और संस्कृति को और अधिक मजबूती से पकड़ लेते हैं। उन्होंने कहा, “एनआरआई लोग अक्सर विदेशों में अधिक भारतीय महसूस करते हैं। वे निश्चित रूप से उस ‘भारतीयता’ या इंडियन-नेस की तलाश में रहते हैं।”
अब भई, यह बात तो बिल्कुल सौ टका सच है। जब तक हम भारत में रहते हैं, हमें पड़ोसी की शादी के शोर और दिवाली के पटाखों से चिढ़ हो सकती है, लेकिन जैसे ही पैर विदेशी सरजमीं पर पड़ते हैं, वैसे ही कान तरस जाते हैं किसी के मुंह से ‘नमस्ते’ सुनने को। विदेश की सड़कों पर घूमते हुए जैसे ही समोसे की खुशबू आती है, मन मयूर नाच उठता है!
प्रीति का खुद का ‘विदेशी’ तजुर्बा
वैसे, प्रीति इस भावना को बहुत अच्छे से समझती हैं। आखिरकार, उन्होंने अमेरिकी बाबू जीन गुडइनफ से शादी की है और अब वो खुद लॉस एंजिल्स में रहती हैं। प्रीति अक्सर सोशल मीडिया पर करवा चौथ, दिवाली और होली मनाते हुए अपनी तस्वीरें शेयर करती हैं। चाहे लॉस एंजिल्स में रहकर ‘घर की खेती’ से टमाटर-मिर्ची तोड़ना हो या अपने बच्चों जय और जिया को भारतीय संस्कार देना हो, प्रीति खुद इस बात की जीती-जागती मिसाल हैं कि शरीर भले विदेश में हो, लेकिन आत्मा हमेशा देसी ही रहती है।
काक-वाणी की पैनी नजर: क्या वाकई ऐसा होता है?
अब हमारे ‘काक-वाणी’ के विश्लेषकों का भी यही मानना है कि जब तक इंसान अपने वतन में रहता है, उसे घर की मुर्गी दाल बराबर लगती है। लेकिन जैसे ही वीजा का ठप्पा लगता है, वैसे ही लोगों को भारत की मिट्टी, यहां के त्योहार और मां के हाथ के परांठे याद आने लगते हैं। प्रीति जिंटा ने एनआरआई के दिल की बिल्कुल सही नस पकड़ी है। तो क्या आप भी प्रीति की इस बात से सहमत हैं कि विदेश जाकर ‘देशभक्ति’ का रंग कुछ ज्यादा ही गहरा हो जाता है?
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