यूनेस्को घोषित सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान से लेकर नासा के शंखनाद तक: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का दिव्य ज्ञान

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ‘परम सत्य’ और बेचारे वैज्ञानिक

सुबह की पहली किरण के साथ जब आपके फोन की ‘टुंग’ बजती है, तो समझ लीजिए कि ज्ञान की गंगा आपके इनबॉक्स में उतर चुकी है। इस गंगा के भगीरथ हैं आपके फूफाजी, मौसाजी और ‘अखंड भारत जनहित ग्रुप’ के एडमिन। ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में आज हम उस दिव्य ज्ञान का फैक्ट-चेक करेंगे, जिसने ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड के प्रोफेसरों को भी अपनी डिग्रियां गंगा में विसर्जित करने पर मजबूर कर दिया है। व्हाट्सएप पर तैरते इस सच और झूठ के खेल में असली विनर तो हमारी भोली जनता ही है।

यूनेस्को का वो ‘थका हुआ’ सर्टिफिकेट

पिछले दस सालों से यूनेस्को (UNESCO) के कर्मचारी दफ्तर बाद में खोलते हैं, पहले भारतीय राष्ट्रगान को ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित करने का नया सर्टिफिकेट जारी करते हैं। हर पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को यह मैसेज इतनी बार फॉरवर्ड होता है कि खुद यूनेस्को के महानिदेशक को भी लगने लगा होगा कि शायद उन्होंने वाकई ऐसा कोई अवॉर्ड दिया था। सच तो यह है कि यूनेस्को को इस बारे में उतनी ही जानकारी है जितनी किसी सामान्य छात्र को उसकी परीक्षा के सिलेबस के बारे में होती है। लेकिन हमारे राष्ट्रप्रेमियों के लिए यह परम सत्य है।

नासा के वैज्ञानिक और अंतरिक्ष में गूंजता ‘ॐ’

दूसरा सबसे बड़ा सच, जो केवल व्हाट्सएप की प्रयोगशाला में ही सिद्ध हो चुका है, वह है नासा (NASA) द्वारा अंतरिक्ष में ‘ॐ’ की ध्वनि सुनना। मैसेज के मुताबिक, नासा के वैज्ञानिक अपने सारे सैटेलाइट और रोवर छोड़कर दिन-रात केवल भारतीय शंख और मंत्रों की आवाज रिकॉर्ड करने में व्यस्त हैं। व्हाट्सएप के ‘परम ज्ञानियों’ का दावा है कि नासा ने यह भी मान लिया है कि शंख बजाने से कोरोना वायरस का फेफड़ों में ही प्राणायाम हो जाता है। बेचारे नासा के वैज्ञानिक अपनी वेबसाइट पर इसका स्पष्टीकरण देते-देते थक चुके हैं, लेकिन हमारे ताऊजी इस ज्ञान को फॉरवर्ड करने से बाज नहीं आते।

गर्म पानी, नींबू और अमरता का अचूक नुस्खा

कैंसर जैसी असाध्य बीमारी का इलाज दुनिया भर के डॉक्टर सालों से ढूंढ रहे हैं, लेकिन हमारे व्हाट्सएप के ‘वैद्यों’ ने इसे सुबह खाली पेट गर्म पानी में नींबू निचोड़कर ही ठीक कर दिया है। यहाँ हर दूसरी गंभीर बीमारी का इलाज ‘हल्दी-दूध’ से शुरू होकर ‘कृपया इसे जनहित में शेयर करें’ पर खत्म होता है। डॉक्टरों की क्या जरूरत है जब आपके पास ऐसे पचास लोगों का ग्रुप हो जो बिना किसी मेडिकल डिग्री के रोज सुबह आपको मुफ्त में अमरता का नुस्खा बांटते हों।

निष्कर्ष: अंगूठे को आराम दें, दिमाग का इस्तेमाल करें

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान एक ऐसा नशा है जिसका कोई तोड़ नहीं है। यहाँ सच और झूठ के बीच केवल एक ‘फॉरवर्ड’ बटन का फासला है। ‘काक-वाणी’ की सलाह यही है कि अगली बार जब कोई मैसेज आपको चौंकाए, तो उसे सच मानकर फॉरवर्ड करने से पहले थोड़ा हंस लें और फिर डिलीट का बटन दबाएं।

कागा जी