व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी को मिला यूनेस्को का ‘सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय’ का तमगा: जानिए इस सच का महा-सच!

सुबह-सुबह जब आप चाय की चुस्की लेते हुए अपने फोन को अनलॉक करते हैं, तो ‘गुड मॉर्निंग’ के रंग-बिरंगे फूलों के साथ एक चमचमाता हुआ संदेश आपका स्वागत करता है। संदेश दावा करता है कि यूनेस्को (UNESCO) ने भारत के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ और सबसे प्रामाणिक विश्वविद्यालय घोषित कर दिया है। काक-वाणी के विशेष खोजी पत्रकारों ने जब इस दावे की गहराई में जाने का फैसला किया, तो जो सच सामने आया, उसने दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों के भी होश उड़ा दिए हैं।

क्या है वायरल दावा?

व्हाट्सएप ग्रुप्स में तेजी से वायरल हो रहे इस संदेश के अनुसार, यूनेस्को के महानिदेशक ने रात के तीन बजे एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह माना गया कि जो ज्ञान नासा (NASA) के वैज्ञानिक करोड़ों डॉलर खर्च करके भी नहीं खोज पाए, वह अद्भुत ज्ञान हमारे देश के ‘शर्मा जी’ और ‘गुप्ता जी’ रोज सुबह-सुबह बिना एक भी पैसा लिए मुफ्त में बांट देते हैं। संदेश में यह चेतावनी भी दी गई है कि इस मैसेज को तुरंत 11 लोगों को न भेजने पर आपका जी-पे अकाउंट ब्लॉक हो सकता है।

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का क्रांतिकारी पाठ्यक्रम

इस अद्भुत विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में ऐसे अनोखे विषय शामिल हैं जो ऑक्सफोर्ड या हार्वर्ड जैसी पिद्दी संस्थाओं में कभी नहीं पढ़ाए जा सकते। उदाहरण के लिए- ‘हरी मिर्च और नींबू लटकाकर जीपीएस सिग्नल कैसे दुरुस्त करें’, ‘प्लास्टिक की बाल्टी से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा’, और सबसे लोकप्रिय विषय- ‘इतिहास को अपनी सुविधानुसार कैसे दोबारा लिखें’। इस विश्वविद्यालय से डिग्री पाने के लिए आपको किसी परीक्षा की जरूरत नहीं है, बस आपका अंगूठा ‘फॉरवर्ड’ बटन पर तेजी से चलना चाहिए।

काक-वाणी की गहन पड़ताल

इस दावे की सच्चाई जानने के लिए हमारी टीम सीधे यूनेस्को के मुख्यालय नहीं गई, क्योंकि हमें पता था कि वहां के बाबुओं को वैसे भी इस महान ज्ञान के बारे में कुछ नहीं पता होगा। इसके बजाय, हमने अपने मोहल्ले के परम ज्ञानी ‘वर्मा जी’ से संपर्क किया, जो प्रतिदिन औसतन 150 ज्ञानवर्धक संदेश फॉरवर्ड करने का डिजिटल रिकॉर्ड रखते हैं।

वर्मा जी ने अपने चश्मे को ठीक करते हुए बेहद गंभीर आवाज में कहा, “देखिए भाई साहब, जो बात व्हाट्सएप पर आ गई, वह ब्रह्मांड का अंतिम सच है। अगर यूनेस्को ने यह घोषणा अभी तक नहीं की है, तो यह उनकी प्रशासनिक ढिलाई है। उन्हें जल्द से जल्द व्हाट्सएप से ही ज्ञान लेकर खुद को अपडेट करना चाहिए।”

फैक्ट चेक का अंतिम निष्कर्ष

हमारी इस बेहद वैज्ञानिक और काल्पनिक जांच के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यह दावा सौ प्रतिशत ‘परम सत्य’ है। क्यों? क्योंकि अगर आप इसे झूठ मानेंगे, तो आपके ग्रुप के एडमिन आपको देशद्रोही घोषित करके ग्रुप से बाहर निकाल सकते हैं। और भला इस कलयुग में ‘फैमिली ग्रुप’ से निकाले जाने का महापाप कौन अपने सिर लेना चाहेगा?

तो देर किस बात की? इस फैक्ट चेक को आंख बंद करके सच मानिए, अपने तर्क और विवेक को तिजोरी में बंद रखिए, और इसे तुरंत अपने अन्य 25 ग्रुप्स में फॉरवर्ड कर दीजिए। याद रहे, अंधविश्वास फैलाने से ही ज्ञान की असली गंगा बहती है!

कागा जी