दुनिया में जब भी शांति, सत्य और निष्पक्षता की बात होगी, इतिहास की किताबों में सबसे पहला नाम चीन के ‘ग्लोबल टाइम्स’ का ही लिखा जाएगा। अब देखिए न, हमारी भारतीय सेना और सरकार बेफिजूल में ही ड्रैगन पर घुसपैठ और सीमा पर गश्त में बाधा डालने का झूठा आरोप लगा रही थी। लेकिन भला हो बीजिंग के उस परम ज्ञानी ‘विशेषज्ञ’ का, जिसने पर्दा उठाकर असली सच दुनिया के सामने रख दिया। उनका कहना है कि सीमा पर चीनी सेना का कोई अतिक्रमण नहीं है, यह तो बस भारत की ‘घरेलू राजनीति’ का एक चुनावी पैंतरा है!
चीन की सीमा पर ‘अहिंसक पिकनिक’ और भारत का शक
काक-वाणी के पाठकों को अब यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सैनिक बंदूकें लेकर नहीं, बल्कि भाईचारे की चाय पीने और तिब्बती जड़ी-बूटियाँ बीनने आते हैं। वे तो वहां बस यह देखने आते हैं कि भारतीय सीमा में हरियाली कैसी है। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी को तो हर चीज में चुनाव और वोट ही नजर आते हैं। अब चीन के बेचारे लाल सैनिकों की क्या गलती, अगर उनकी दो-चार किलोमीटर की मासूम ‘टहलकदमी’ से भारत में चुनावी रैलियों का गर्मागर्म भाषण तैयार हो जाता है?
‘ग्लोबल टाइम्स’ का पत्रकारिता में नोबेल-तुल्य योगदान
चीन के इस निष्पक्ष सरकारी भोंपू ने यह महान खोज की है कि भारतीय राजनीति पूरी तरह से चीनी गश्त पर ही निर्भर है। यानी अगर चीनी सेना सीमा पर शांति से बैठ जाए, तो भारत में नेताओं के लिए वोट मांगना ही मुश्किल हो जाएगा! सत्ता पक्ष कहेगा कि हमने ड्रैगन को लाल आंखें दिखा दीं, और विपक्ष चिल्लाएगा कि ड्रैगन हमारी जमीन निगल गया। तो कुल मिलाकर, भारत के लोकतंत्र को जिंदा रखने का पूरा श्रेय चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को जाता है, जो सिर्फ भारतीय नेताओं को चुनावी ‘मुद्दा’ देने के लिए माइनस डिग्री तापमान में बर्फ में खड़ी रहती है। त्याग हो तो ऐसा!
काक-वाणी का कड़वा निष्कर्ष
हम तो भारत सरकार को यही सलाह देंगे कि तुरंत चीनी ‘विशेषज्ञों’ की बात मान ली जाए। सीमा सुरक्षा पर फिजूल का ध्यान देने के बजाय, ड्रैगन के साथ मिलकर एक ‘इलेक्शन टूरिज्म’ शुरू कर देना चाहिए। आखिर ड्रैगन का दिल इतना साफ है कि वह हमारी जमीन छीनने नहीं, बल्कि हमारे नेताओं के चुनाव प्रचार में मदद करने आता है। ऐसे निष्पाप पड़ोसी पर शक करना महापाप है, और ‘ग्लोबल टाइम्स’ की बात न मानना सीधे-सीधे पत्रकारिता का अपमान है!
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