Title: अपने हाथों की कमाई
विक्रम एक गन्ने के खेत में काम करता था। उसे पैसों की बहुत तलाश थी क्योंकि उसके परिवार की मदद करने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता था। उसे लगता था कि उसकी टॉप नौकरी पाकिस्तान के आस पास मिलेगी। लेकिन उसके साथ कुछ अनूठा हो गया था। एक सुंदर लड़की इस खेत में आने लगी और आम तौर पर लड़की ने फार्मर की सहायता करते हुए कपड़ों और फसल को ढाली की। विक्रम उसके सुदूर से देखता था।
एक दिन उस लड़की ने उस से पूछा: “तुम ऐसे क्यों रहते हो? तुम बात करने से विराम क्यों नहीं लेते?”
विक्रम ने दो दिनों तक उस लड़की से बात की और फिर उसके साथ एक साथ काम करने लगा। वे बहुत काम कर रहे थे लेकिन हर्शद ने शुरू में सांत्वना दी और उसके व्यक्तिगत जीवन में उसे इतनी अहमियत दी जिसकी उसे कभी भी उम्मीद नहीं थी।
विक्रम ने बड़ी कल्पनाओं की संसाधनाएं बनाना शुरू कीं। सुंदर बैगों, टीशर्ट और कमीज आदि के साथ साथ वो कुछ खेल बनाना भी शुरू की थी। सभी चीजें बहुत अच्छी बनती थीं। ना जाने कितने लोग भी कमरा काम कर अपने रोज़गार मिल गए।
फिर एक दिन, विक्रम मंदी की घाट में पड़ गए। भाग्यशाली तरीके से, उसे धीमी परिस्थितियों में बेहतर अंदाज में आगे बढ़ना पड़ा। उसने अपनी स्थिति से निबटने के लिए अपने कुछ कल्याण की निवेश बचा लिया। अपने के बारे में सोचते हुए, उसने कीमतों में बहुत नीचे पहुंच जाने की खुशी और खुशी महसूस की क्योंकि अब वो एक नए धन की विचारधारा से लैस हो गया था।
विक्रम कक्ष का उद्घाटन घराने वासियों ने श्रद्धापूर्वक किया। क्रोधित नहीं होने के बीच वो उनसे आग्रह मांगते रहे कि वो उनकी शब्दों की संवेदनशीलता समझते हैं और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
अब कुछ साल बीत गए हैं। विक्रम ने अपने हाथों से कमाई की और अपने मुल्क की तरक्की में बड़ा हिस्सा लिया। अब वो पैसा कमाने का काम नहीं करते हैं बल्कि अपने बच्चों के साथ अपनी परिवार का समय बिताते हैं।
अन्त में, विक्रम जीवन में इस बात का अहसास कराता है कि ऐसे बदलाव, जो उसने कुछ साल पहले किए थे, वे उसे आगे बढ़ने के लिए एक अवसर तरीके से पेश करते हैं। अगर आप अपने हाथों से कमाई करना चाहते हैं, तो आपको अपनी कल्पना से आगे बढ़कर किसी न किसी क्षेत्र में काम करना होगा।