Title: “अवसर”
अवसर कभी घर पर तकदीर नहीं लेकिन कभी ज़िन्दगी को रास्ता दिखा देते हैं। यह ऐसा ही एक अवसर था जो सच्चाई को एक ही जगह पर मिला देने वाला था लेकिन उस व्यक्ति की नजर कुछ और थी जो उस अवसर को गंवा देने से कर रहा था। वह अवसर फिर नहीं मिलेगा।
रोहित एक बेरोज़गार जवान था जो बड़ी उम्मीदों से शहर में आता रहा था अपने भविष्य के लिए। सपने बड़े थे लेकिन संघर्ष ज्यादा। अब उसे नौकरी नहीं मिल रही थी और पैसे भी संभालने में मुश्किल होती जा रही थीं। जीवन में से उम्मीद के दरवाज़े बंद होते जा रहे थे। उसे कुछ समय के लिए जॉब के लिए बाहर कहीं जाना पड़ा लेकिन उसे वहां भी सुधारा ही नहीं। रोहित थक चूका था। नई जगहों के लिए आत्मसमर्पण टूटता जा रहा था। इसलिए नौकरी खोजने की वह तलाश में एक दिन एक स्कूल में अनुदेशक के रूप में आया। उसे अध्यापक ने बड़े ही उत्साह से अपने बच्चों के ऊपर ध्यान करना होता हुआ समझाया। वह घर लौटे तो सोचने लगा कि उसकी जिंदगी नायब हो चुकी है। उसे नौकरी नहीं मिलती तो उसे अपने सपनों के बारे में सोचना भी अब बंद हो जाएगा।
जीवन एक रुका हुआ सिर था लेकिन अचानक एक दिन उसकी जिंदगी में एक अवसर आ पड़ा। उस स्कूल में नौकरी करने का मौका मिल गया। वह उस स्कूल में नियामक निकाय के सदस्य बन गया। साझा काम करने का मौका और कुछ सीखने का मौका अब उसके सामने था। उसे वहाँ बहुत सम्मान मिलता था। अब वह ड्यूटी पर भी नौकरी जाना पसंद करता था। ड्यूटी खत्म होने के बाद, अध्यापक कुछ खाने को लेकर यहाँ आते। वह रोहित से बात करते और उसे बहुत समझाते। वह उससे कभी नहीं जानते थे पर कुछ बात कहते थे, जो उसे सही आ जाते थे।
कुछ समय बीत गया और एक दिन उसने महसूस किया जैसे कुछ अलग हो रहा है। वह नौकरी में खुश नहीं था। वह अपनी वापसी की तलाश में था। नौकरी करना उसे अध्यापन से ज्यादा आकर्षित करता था। वह एक दिन, अध्यापक को अपनी होशियारी में खींच लिया और मन में नौकरी के विचार से ज्यादा उसके अध्यापन की विचार आने लगा।
उसने अपने दरवाजे को खोला और भागते हुए अपनी बाईं और बाईं ओर दौड़ने लगा। वह एक सेंट्रल मकम से होते हुए प्लेगदा के किनारे आ गया, जहां एक छोटी सी दुकान थी। दुकानदार कहा गया, “आस-पास देखो, शायद वहां कुछ हो सकता है।” बुढ़ापा के दबे पाँव वाले एक व्यक्ति उससे नौकरी के विचारों के बारे में बात कर रहा था। उस व्यक्ति को सुनते हुए रोहित फैसला लिया कि उसे कुछ दिन दुकान में काम करना होगा।
जब वह कुछ दिनों तक दुकान से दूर रहा तो उस्की जिंदगी पर ज़्यादा असर नहीं हुआ था। एक दिन जब उसे पता चला कि उसे स्थानीय स्कूलों में एक संगीत की कक्षा में कब और कहाँ खुलेगी, तो वह उसे अपने ही स्कूल से जुड़ा हुआ पता चला। उसे समझ में नहीं आया कि कैसे यह संयोग हुआ। लग रहा था, जैसे वह उस अवसर की ओर तेज़ी से आ रहा हो।
देर से जाने के बाद वह अपनी रूठी हुई पत्नी से मिला। वहन मिलते ही उसने कहा कि उसे संगीत का अपना बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए पढ़वाना है। वह एक दिन, अध्यापक की स्कूल के किनारे से संगीत की कक्षा में खुल जाएगी, तो उसका दिमाग फिर से सोचने लगा कि शायद उस स्कूल में नौकरी करना ही सबसे अच्छा होगा।
परिवर्तन के दरवाजे कुछ भी उसको नहीं दिखा रहे थे लेकिन उसे यह महसूस होता था कि वह यहाँ से निकला नहीं है। अध्यापक उसे आगे बढ़ते हुए देख रहे थे। रोहित का एक वृद्ध बंदूकविद रोहित को आशीर्वाद देने के लिए उसके पास आया और बोला, “मेरा जैसे होना आपकी उम्र से ज्यादा फायदेमंद होता है। वे इन बातों को जल्द समझ लेते हैं जो वे नहीं करते।” समझाने में देर मत करना। लेकिन उसे पता नहीं था कि एक नौकरी नहीं, एक अवसर है, जो उसे आगे बढ़ने के लिए दे रहा है।