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Story दो दोस्तों की कहानी – संगरोध? यश और सचिन

Story Title: दो दोस्तों की कहानी – संगरोध?

यश और सचिन एक दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे। दोनों हमेशा एक दूसरे के साथ होते थे और बहुत मस्ती करते थे। यश के घर के सामने एक छोटी सी नदी बहती थी। दोनों दोस्त नदी के किनारे बैठकर अपनी बातें करते थे और मस्ती करते थे।

एक दिन, जब यश और सचिन नदी के किनारे बैठे हुए थे, तभी देखा कि अंदर से निकला हुआ कुछ सुनाई दे रहा था। यश ने ध्यान से सुना तो उसने समझा कि कोई झाड़ू जो नदी में गिर गया होगा, उसका आवाज आ रहा होगा।

यश और सचिन एक दूसरे की तरफ देखते हुए उन्होंने नदी के अंदर देखा तो उन्होंने देखा कि वहाँ एक नन्हा सा जानवर जल में फंसा हुआ था। वहाँ छोटी सी मछलियों ने उस जानवर को कुछ बार छाता भी मारा था।

यश और सचिन ने देखा कि वह जानवर बिल्कुल मुस्कुरा रहा है जैसे कि उसे कोई खुशी मिल रही हो। दोनों जैसे जल से निकलकर अन्दर गए बहुत एक नन्हा सा पुल हुआ करता था, उसके ऊपर से से वह जानवर फंसा हुआ था।

उन दोनों को वहाँ पहुंचते हुए लगा कि सारी मछलियां वहाँ आकर उन्हें आशीर्वाद दे रही हैं। जैसे ही आसमान से हल्की सी बूंदें गिरीं, जानवर दूध पी गया था।

दोनों ने उसे जल से बाहर निकाला और वह जानवर अपनी माँ के पास जाकर गुमनाम हो गया। इसी बीच, यश ने सोचा कि वह पुल कहाँ से आया होगा तो सचिन ने बताया कि वह पुल एक बहुत डरावनी स्थिति में है।

सचिन ने बताया कि कुछ समय पूर्व, धूम धाम से बेहाल होकर दौड़ते हुए एक लड़के ने उस पुल से कूद जाने की कोशिश की थी। वह पुल बहुत ऊँचा होता है और चारों तरफ से झील फैली हुई होती है। वह लड़का फंस गया था और उसे बाहर निकालने के लिए अधिकांश समुदाय की मदद रास नहीं आई थी। लड़का बहुत तकलीफ में था और उसे बचाने के लिए अधिकांश समुदाय अपने आप को शिकार नहीं दे रही थी।

उसी समय कुछ दोस्तों ने अपने कुत्ते को कहीं से ला कर उसे पुल के पास लाया था और पुल के किनारे खड़े होकर जोर जोर से बोलने के साथ उसे समझाया कि वह कुत्ता उसे कहीं सुरक्षित जगह ले जाएगा और उसे लंबे समय तक रख उसे सहायता देगा।

लड़का ने कुत्ते को उसकी भाषा में समझाया कि उसे आशा है कि वह उसे समझेगा और उसकी सहायता करेगा।

शुरुआत में कुत्ता लड़के के साथ खुश नहीं था, लेकिन वह ऊंची ऊंची सीढ़ियों से ऊपर जाने के बाद, उसने लड़के को समझा दिया कि उसे समझता है और उसकी सहायता करेगा। उसके बाद, जब लड़का घबराकर थरथराने लगा तो कुत्ता उसे ढक लेता था और उसे जस्ता देने लगता था ताकि वह ठंडे नहीं लगे।

यश और सचिन ने बहुत विचार किया और फिर उन्होंने अपने निर्णय किया कि कुत्ते की तरह ही हम हमारे समुदाय में प्रवेश करेंगे। इस बात से प्रेरित हुए, वे अपने मूल पुल पर चले गए और अपने आप को खतरे से बचाने के लिए समुदाय के लोगों को समझाया। उन्होंने उन्हें समझाया कि हम अपने आप को फंसाने से बचने के लिए एक दूसरे की मदद कर सकते हैं।

इस प्रकार, यश और सचिन ने संगरोध को हल किया और समुदाय को एक सैन्य जैसी ताकत बनाया। उन्हें सफलता मिली और वे दोनों मिलकर यादगार बनाने में कामयाब रहे।

ये दो दोस्तों की कहानी उत्तेजक और दिलचस्प थी। इससे हमें यह समझ मिलता है कि हम दुनिया में अकेले नहीं हैं, हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिए और आपस में एक दूसरे के बचाव में लगभग सदैव कामयाब होते हैं।

कागा जी

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