ज्ञान का महासागर: हमारा WhatsApp ग्रुप
नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका काक-वाणी के विशेष बुलेटिन ‘WhatsApp University’ में। सुबह-सुबह जब आपकी आंखें खुलती हैं, तो सबसे पहले क्या दिखता है? एक चमकीला गुलाब का फूल, जिस पर लिखा होता है “शुभ प्रभात” और उसके ठीक नीचे एक ऐसा दावा जो अल्बर्ट आइंस्टीन की आत्मा को भी झकझोर दे। जी हां, हमारे पारिवारिक ग्रुप्स में घूम रहे इन ‘परम सत्यों’ को पढ़कर तो कभी-कभी लगता है कि नासा और यूनेस्को के पास भारत के WhatsApp फॉरवर्ड्स को प्रमाणित करने के अलावा दुनिया में कोई दूसरा काम ही नहीं बचा है।
यूनेस्को का थका हुआ राष्ट्रगान अवार्ड
पिछले दस सालों से एक खबर लगातार तैर रही है कि यूनेस्को (UNESCO) ने हमारे राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है। इस संदेश को इतनी बार फॉरवर्ड किया जा चुका है कि अब तो यूनेस्को के महानिदेशक भी अपना सिर पकड़कर बैठ गए होंगे। सच्चाई यह है कि यूनेस्को ऐसी कोई प्रतियोगिता आयोजित ही नहीं करता। लेकिन हमारे फूफाजी को कौन समझाए? वे तो हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को इस मैसेज को इस गर्व के साथ री-सर्कुलेट करते हैं जैसे यूनेस्को के अधिकारी खुद उनके घर पदक सौंपकर गए हों।
नासा का ‘सूर्य से ॐ की आवाज’ सुनना
दूसरा सबसे लोकप्रिय वैज्ञानिक दावा है कि नासा (NASA) ने सूर्य की आवाज रिकॉर्ड की है, और उसमें से स्पष्ट रूप से ‘ॐ’ की ध्वनि सुनाई दे रही है। वैसे तो अंतरिक्ष में वैक्यूम (शून्य) होने के कारण ध्वनि तरंगें यात्रा ही नहीं कर सकतीं, लेकिन विज्ञान की इतनी औकात कहां कि वह हमारे ‘फॉरवर्ड’ बटन का मुकाबला कर सके! नासा वाले बेचारे आज भी टेलिस्कोप की लेंस साफ कर रहे हैं और यहां WhatsApp के वैज्ञानिकों ने सूर्यदेव से सीधे वैदिक मंत्रोच्चार करवा दिया है।
गर्म पानी से कैंसर का इलाज और चमत्कारी फॉरवर्ड
चिकित्सा जगत के ऐसे-ऐसे क्रांतिकारी नुस्खे यहां मुफ्त मिलते हैं कि एम्स के डॉक्टर अपनी डिग्रियां गंगा में बहा दें। जैसे “सुबह खाली पेट खौलता हुआ पानी पीने से कैंसर जड़ से खत्म हो जाता है।” इन दावों के नीचे हमेशा एक धमकी भरी चेतावनी होती है: “इसे कम से कम 11 लोगों को भेजें, शाम तक खुशखबरी मिलेगी।” हमने तो भेजा था, लेकिन खुशखबरी की जगह फोन हैंग हो गया और पिताजी से ‘फालतू मैसेज भेजने’ की डांट पड़ी, सो अलग!
सत्य की खोज
तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आपके ग्रुप में कोई ऐसा मैसेज आए जिसमें लिखा हो कि “इसे इतना फैलाओ कि सरकार जाग जाए”, तो थोड़ा रुकिए। सरकार जगे न जगे, अपनी तार्किक बुद्धि को सोने मत दीजिए। शेयर करने से पहले जरा गूगल बाबा से पूछ लीजिए, वरना ‘काक-वाणी’ तो है ही आपकी आंखें खोलने के लिए!