काक-वाणी विशेष: WhatsApp यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च लैब
प्रिय देशवासियों और असीमित डेटा-पैक के उपभोक्ताओं, बधाई हो! आपके सुबह-शाम के मुफ्त मनोरंजन को और अधिक ‘सच्चा’ बनाने के लिए WhatsApp यूनिवर्सिटी ने अपना नया ‘फैक्ट-चेक’ विभाग खोल लिया है। अब तक आप केवल बिना सोचे-समझे मैसेज फॉरवर्ड करते थे, लेकिन अब आप पूरे ‘वैज्ञानिक प्रमाण’ के साथ झूठ फैला सकते हैं। इस नए विभाग का एकमात्र उद्देश्य है—हर उस खबर को सच साबित करना, जिसे सामान्य दुनिया ‘अफवाह’ कहती है।
यूनेस्को और नासा की ‘अंतिम मुहर’
इस यूनिवर्सिटी के नए फैक्ट-चेक नियमों के अनुसार, किसी भी खबर को परम सत्य प्रमाणित करने के लिए दुनिया में केवल दो ही संस्थाएं काफी हैं—नासा (NASA) और यूनेस्को (UNESCO)। अगर आपके पास कोई मैसेज आया है कि “यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे बेहतरीन राष्ट्रगान घोषित किया है,” तो आपको किसी गूगल-फूगल की जरूरत नहीं है। हमारे फूफा जी के लड़के ने इसे ‘फैक्ट-चेक’ कर लिया है क्योंकि उन्होंने इसे खुद तीन अलग-अलग पारिवारिक ग्रुप्स में देखा है। अगर नासा ने दिवाली के दिन भारत की फोटो अंतरिक्ष से चमचमाती हुई खींची है, तो वह सौ प्रतिशत सच है, भले ही वह फोटो साल 2012 के किसी वीडियो गेम का स्क्रीनशॉट क्यों न हो!
चिप वाले नोट और लहसुन का ‘चमत्कार’
इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम की सबसे बड़ी खोज वह ‘जीपीएस चिप’ थी, जो बंद हो चुके 2000 रुपये के नोटों में पाई गई थी। जब दुनिया के मूर्ख पत्रकार इस पर हंस रहे थे, तब WhatsApp के वैज्ञानिकों ने ‘फैक्ट-चेक’ करके बताया कि यह चिप पाताल लोक से भी सिग्नल भेज सकती है। इसी तरह, उबला हुआ लहसुन का पानी पीने से दुनिया की हर बीमारी ठीक हो जाती है, इस तथ्य को ‘घरेलू नुस्खा विभाग’ ने प्रमाणित किया है। इसके लिए किसी मेडिकल रिसर्च की जरूरत नहीं, बस मैसेज के नीचे ‘जापान के डॉक्टर ने कहा’ लिखना अनिवार्य है।
फॉरवर्ड न करने पर ‘महापाप’ की चेतावनी
इस आधुनिक फैक्ट-चेक का सबसे अचूक और अचंभित करने वाला हथियार है ‘नैतिक दबाव’। यदि किसी संदेश के अंत में लिखा है कि “इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक शुभ समाचार मिलेगा, नहीं तो अनिष्ट होगा,” तो वह संदेश स्वतः ही प्रमाणित सत्य बन जाता है। इसे न भेजने वाले को समाजद्रोही घोषित करने का अधिकार भी इसी यूनिवर्सिटी के पास सुरक्षित है। तो देर किस बात की? अपनी बुद्धि और तर्क को कोपभवन में डालिए, अंगूठा उठाइए और ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाइए। आखिर काक-वाणी भी तो यही कहती है कि जब तक आपके पास मुफ्त इंटरनेट है, तब तक आप परम ज्ञानी हैं!