जब-जब कांग्रेस रूपी जहाज में छेद बड़ा होने लगता है और उसमें पानी भरने लगता है, तब-तब आलाकमान अपने तरकश से सबसे अचूक मिसाइलें निकालता है—जिन्हें राजनीति की भाषा में ‘पर्यवेक्षक’ कहा जाता है। इस बार पंजाब की राजनीति के उबलते कढ़ाई को और गहराई से ‘देखने’ के लिए दिल्ली से दो परम ज्ञानी महारथियों को रवाना किया गया है—अजय माकन और मीनाक्षी नटराजन। वाह! क्या टाइमिंग है और क्या बेमिसाल चॉइस है!
‘पर्यवेक्षक’ का असली मतलब: सिर्फ देखना, कुछ न करना
हिंदी डिक्शनरी में ‘पर्यवेक्षक’ का अर्थ भले ही कुछ और हो, लेकिन कांग्रेस की पॉलिटिकल डिक्शनरी में इसका सीधा और सरल मतलब होता है—”मूकदर्शक”। जब पंजाब कांग्रेस के महारथी आपस में एक-दूसरे की पगड़ी उछाल रहे होंगे, तब माकन साहब और नटराजन जी वहां बैठकर अत्यंत गंभीरता से इस ऐतिहासिक दृश्य का अवलोकन करेंगे। आखिर इतिहास को अपनी आंखों के सामने बनते और बिगड़ते देखना भी तो एक महान कला है!
अजय माकन जी का ट्रैक रिकॉर्ड तो ऐसा रहा है कि वे जहां भी पैर रखते हैं, वहां की बची-खुची संगठन संरचना भी ‘आत्मनिर्भर’ होकर बिखर जाती है। दिल्ली में कांग्रेस को शून्य पर पहुंचाने का उनका अनुभव जगजाहिर है। राजस्थान में जब अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच ‘महाभारत’ चल रहा था, तब भी माकन साहब वहां ‘शांतिदूत’ बनकर गए थे। परिणाम क्या हुआ? दोनों गुटों ने मिलकर इन्हें ही साइडलाइन कर दिया। अब वही दिव्य और चमत्कारी अनुभव वे पंजाब की धरती पर बांटने जा रहे हैं।
पंजाब की कलह और हाईकमान का ‘फायर फाइटिंग’ फार्मूला
पंजाब कांग्रेस का हाल फिलहाल उस शादी जैसा है जहां दूल्हा-दुल्हन से ज्यादा फूफा, मौसा और जीजाजी नाराज घूम रहे हैं। ऐसे गर्म माहौल में मीनाक्षी नटराजन जैसी शांत और सौम्य नेत्री को भेजना वैसा ही है, जैसे धधकते कोयले पर बर्फ की एक छोटी सी थैली रख देना। आलाकमान का शायद यह मानना है कि पंजाब के गुस्सैल और बगावती नेता इन दोनों दिल्ली दरबार के दूतों को देखकर एकदम शांत हो जाएंगे और अपनी आपसी दुश्मनी भूलकर गले मिल लेंगे। क्या गजब की आशावादिता है! राहुल गांधी जी के इस विजन को तो सीधे नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जाना चाहिए।
काक-वाणी की अंतिम टिप्पणी
‘काक-वाणी’ का मानना है कि पंजाब में लगी सियासी आग को बुझाने के लिए किसी फायर ब्रिगेड की जरूरत थी, लेकिन आलाकमान ने थर्मामीटर भेज दिया है। यह थर्मामीटर सिर्फ तापमान नापेगा, दिल्ली दरबार में रिपोर्ट सौंपेगा और कहेगा—”हां हुजूर, बुखार 105 डिग्री है, मरीज आखिरी सांसें ले रहा है।” शुभकामनाएं माकन जी और नटराजन जी, पंजाब में मक्के की रोटी और सरसों के साग का आनंद लीजिए, क्योंकि पंजाब कांग्रेस को संभालना तो वैसे भी आपके बस का नहीं है!
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