शहंशाह का अधूरापन और एक अनोखा सवाल
एक शाम शहंशाह अकबर अपने महल के झरोखे से डूबते हुए सूरज को देख रहे थे। उनके पास दुनिया की हर दौलत, ताकत और शौहरत थी, लेकिन फिर भी उनका मन उदास था। उन्हें महसूस हो रहा था कि महलों की इस चकाचौंध में कुछ खो गया है। तभी वहाँ बीरबल पहुँचे। अकबर ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “बीरबल, मेरे पास सब कुछ है, लेकिन मेरा दिल खाली है। क्या तुम मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली चीज़ दिखा सकते हो? कुछ ऐसा, जिसे देखकर मेरी आँखों में खुशी के आँसू आ जाएँ।”
बीरबल ने शहंशाह के चेहरे की उदासी को पढ़ा और मुस्कुराकर सिर झुकाया। उन्होंने कहा, “जहाँपनाह, मुझे तीन दिन का समय दीजिए। मैं आपको इस दुनिया का सबसे अनमोल और खूबसूरत सच दिखाऊँगा।”
बीरबल की अनोखी खोज
बीरबल ने किसी बेशकीमती हीरे या सोने के महल की तलाश नहीं की। वे साम्राज्य के सबसे गरीब और पिछड़े इलाके की तरफ निकल पड़े। वे देखना चाहते थे कि जहाँ सुख-सुविधाएँ नहीं हैं, वहाँ लोग कैसे जीते हैं। घूमते-घूमते तीसरे दिन, बीरबल को एक टूटी-फूटी झोपड़ी दिखाई दी।
झोपड़ी के बाहर एक अंधी माँ बैठी थी, जिसके कपड़े फटे हुए थे। उसकी गोद में उसका छोटा सा, कमजोर बेटा था। वह माँ अपने बच्चे के सूखे चेहरे को चूम रही थी और उसे सूखी रोटी का एक टुकड़ा खिलाते हुए मीठी लोरी गा रही थी। बच्चा अपनी माँ की गोद में ऐसे मुस्कुरा रहा था मानो वह दुनिया का सबसे अमीर शहजादा हो। उस अंधी माँ के चेहरे पर संतोष और प्रेम का जो भाव था, उसने बीरबल के दिल को छू लिया। बीरबल समझ गए कि उन्हें शहंशाह के सवाल का जवाब मिल गया है।
दरबार में भावना का सैलाब
अगले दिन, बीरबल उस गरीब अंधी माँ और उसके बच्चे को आदरपूर्वक दरबार में ले आए। दरबारी उन्हें देखकर कानाफूसी करने लगे कि ये फटेहाल लोग शहंशाह को क्या खुशी देंगे। अकबर ने भी थोड़े आश्चर्य से पूछा, “बीरबल, तुम यह किसे ले आए हो? क्या यही दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ है?”
बीरबल ने अत्यंत नम्रता से कहा, “जहाँपनाह, जरा इस माँ की आँखों को देखिए। भले ही इनमें रोशनी नहीं है, लेकिन अपने बच्चे के लिए इसमें असीम प्यार की चमक है। इस बच्चे के चेहरे की मुस्कान देखिए, जिसे सोने-चाँदी की भूख नहीं, बल्कि अपनी माँ की गोद में ही जन्नत का अहसास है। जहाँपनाह, दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ कोई बेजान मूर्ति या महल नहीं, बल्कि एक माँ का निस्वार्थ प्रेम और ममता है।”
अकबर ने जब उस बच्चे को अपनी अंधी माँ के आँसू पोंछते और उससे लिपटते देखा, तो उनका दिल पिघल गया। शहंशाह की आँखों से आँसू बहने लगे। उन्हें अपनी स्वर्गीय माँ की याद आ गई, जिनका निस्वार्थ प्यार वे सालों पहले खो चुके थे। अकबर सिंहासन से उठे, उस बच्चे को अपनी गोदी में उठाया और उस माँ के चरणों में सोने की मुहरों से भरी थैली रख दी। अकबर ने कहा, “बीरबल, आज तुम्हारी चतुराई ने मेरे अहंकार को मिटा दिया और मुझे अहसास कराया कि असली दौलत क्या है।”
कहानी की सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि: दुनिया की सबसे कीमती और खूबसूरत चीज़ों को पैसों से नहीं खरीदा जा सकता। निस्वार्थ प्रेम, ममता और परिवार का साथ ही जीवन का असली धन है।