सुबह के ठीक छह बजते ही जब आपके फोन की घंटी उगते हुए सूरज और गुलाब के फूल वाले ‘सुप्रभात’ संदेश के साथ बजती है, तो समझ लीजिए कि ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। इस अद्भुत विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बिना किसी प्रवेश परीक्षा के हर कोई सीधे ‘पीएचडी’ की डिग्री लेकर पैदा होता है। यहाँ ज्ञान की ऐसी अविरल गंगा बहती है, जिसमें लॉजिक, विज्ञान और कॉमन सेंस तीनों एक साथ जलसमाधि ले लेते हैं।
नासा की दिवाली और यूनेस्को का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान
इस विश्वविद्यालय के सबसे लोकप्रिय और बारहमासी शोधों में से एक है—नासा द्वारा अंतरिक्ष से खींची गई भारत की दिवाली वाली चमकीली तस्वीर। बेचारे नासा के वैज्ञानिक हर साल दिवाली पर अंतरिक्ष में कैमरे दुरुस्त करके बैठते हैं कि कब भारत में दीये जलें और कब वे फोटो खींचकर व्हाट्सएप ग्रुप्स पर भेजें। इसके बाद नंबर आता है ‘यूनेस्को’ का। यूनेस्को का एकमात्र काम दुनिया भर के ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि हर साल भारतीय राष्ट्रगान को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित करना है। यूनेस्को थक गया मना करते-करते, लेकिन हमारे व्हाट्सएप के कुलपतियों ने उन्हें सर्टिफिकेट बांटने का काम सौंप ही दिया।
₹2000 के नोट में छिपी ‘नैनो-जीपीएस चिप’
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की सबसे महान खोज थी—दो हजार रुपये के नोट में लगी ‘नैनो-जीपीएस चिप’। दावा किया गया था कि अगर आप इस नोट को जमीन के 120 फीट नीचे भी गाड़ देंगे, तो सैटेलाइट सीधे आपके घर पर रेड डलवा देगी। आज जब वह गुलाबी नोट इतिहास का हिस्सा बन चुका है, तो कोई उन प्रोफेसरों से नहीं पूछ रहा कि भाई, वो जादुई चिप अब किस कूड़ेदान से सिग्नल भेज रही है? इस अभूतपूर्व खोज के लिए तो स्वीडन की कमेटी को सीधे व्हाट्सएप पर ही नोबेल प्राइज भेज देना चाहिए था।
अकाट्य प्रमाण: ‘फॉरवर्डेड ऐज रिसीव्ड’
यहाँ किसी भी खबर की सत्यता जांचने की केवल एक ही कसौटी है—वह मैसेज ‘फॉरवर्डेड ऐज रिसीव्ड’ होना चाहिए। इस यूनिवर्सिटी के चांसलर यानी हमारे प्रिय ‘फूफा जी’ और ‘मौसा जी’ सुबह-सुबह चाय की चुस्की के साथ इलायची से कैंसर का इलाज और तांबे के लोटे से कोरोना वायरस का खात्मा चुटकियों में कर देते हैं। डब्ल्यूएचओ (WHO) के डॉक्टर तो बस यूं ही सालों-साल रिसर्च में बर्बाद करते हैं, असली लैब तो हमारे पारिवारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में चलती है।
काक-वाणी की सच्ची सलाह
व्यंग्य से इतर, इस यूनिवर्सिटी का यह मुफ्त का ज्ञान समाज के लिए एक मीठा जहर बनता जा रहा है। अफवाहों और फर्जी दावों के जाल में फंसकर लोग अपनी सेहत और संपत्ति दोनों दांव पर लगा देते हैं। इसलिए, अगली बार जब आपके पास कोई ‘चमत्कारी’ या ‘चेतावनी’ वाला मैसेज आए, तो ‘फॉरवर्ड’ की उंगली को थोड़ा आराम दें और गूगल बाबा से पूछें कि सच क्या है। याद रखिए, हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती और हर व्हाट्सएप फॉरवर्ड सच नहीं होता।