प्रणाम भाइयों और उनकी बहनों! ‘काक-वाणी’ की मुंडेर पर आज एक विदेशी गोरी चिड़िया आकर बैठी है, जिसका नाम ‘ब्लूमबर्ग’ है। यह चिड़िया सात समंदर पार से उड़कर आई है और भारत के लोकतंत्र को देखकर चकित-भ्रमित है। इस विदेशी चिड़िया ने एक गंभीर खबर दी है—”संसद में विरोध प्रदर्शनों के चलते मोदी जी भारी दबाव में हैं।”
अरे भाई, इस खबर को पढ़कर हमारी ‘काव-काव’ हंसी में बदल गई! गोरे पत्रकारों को कौन समझाए कि जिसे वे ‘दबाव’ (Pressure) कह रहे हैं, हमारे देश में उसे ‘संसदीय मनोरंजन’ और ‘टाइमपास’ कहा जाता है।
अब जरा सोचिए, जिस महामानव ने इतिहास की सबसे बड़ी नोटबंदी, जीएसटी, और कड़कड़ाती ठंड में महीनों चले किसान आंदोलनों को बिना पलक झपकाए ‘डील’ कर लिया हो, वो संसद में विपक्ष के कुछ कागजी हवाई जहाजों और “वी वॉन्ट जस्टिस” के नारों से दबाव में आ जाएंगे? साहेब का सीना 56 इंच का है भाई, कोई नॉन-स्टिक पैन नहीं जो विपक्ष के तड़के से पिघल जाए!
वैसे, ब्लूमबर्ग वालों को भारतीय संसद की कार्यप्रणाली का ज्ञान थोड़ा कम है। हमारे यहाँ संसद में विरोध प्रदर्शन होना उतना ही स्वाभाविक है, जितना मानसून में मुंबई की सड़कों पर पानी भरना। विपक्ष का काम है नारे लगाना, तख्तियां दिखाना और वेल (Well) में आकर गले की कसरत करना। वहीं सरकार का काम है—कानों में रूई ठूंसकर, बिना किसी बहस के, धड़ाधड़ बिल पास करा लेना। इसे ‘आपदा में अवसर’ खोजना कहते हैं, दबाव नहीं!
विदेशी मीडिया को लगता है कि संसद कोई ऐसी जगह है जहाँ लोग बैठकर देश के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करते हैं। अरे साहब, हमारे यहाँ संसद तो वो अखाड़ा है जहाँ ‘डेसिबल लेवल’ (आवाज की तीव्रता) से तय होता है कि कौन कितना बड़ा देशभक्त या क्रांतिकारी है।
काक-वाणी का निष्पक्ष आकलन तो यही कहता है कि साहेब पर कोई दबाव-वबाव नहीं है। हाँ, असली दबाव तो संसद के कैमरामैन पर है, जिसे इतने हंगामे और शोर-शराबे के बीच भी बड़ी चालाकी से कैमरे का फोकस साहेब के ‘तेजस्वी और मुस्कुराते’ चेहरे पर बनाए रखना पड़ता है। दबाव तो उस बुलेटिन लेखक पर है जिसे शाम को दिखाना है कि ‘सब चंगा सी!’
इसलिए, प्रिय ब्लूमबर्ग, अगली बार जब आप भारत के राजनीतिक दबाव को नापने बैठें, तो अपना बैरोमीटर घर पर ही छोड़ आएं। यहाँ का प्रेशर कुकर सीटी भी मारता है, भाप भी छोड़ता है, लेकिन दाल हमेशा अंदर ही गलती है। तब तक के लिए, कांव-कांव!
संदर्भ मुख्य समाचार: Modi Faces Pressure as Parliament Hit by Protest Fallout – bloomberg.com