नमस्कार, ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। आज हम उस महान ज्ञान की बात करेंगे जो रोज सुबह-सुबह चाय की चुस्की के साथ हमारे इनबॉक्स में टपकता है। एक ऐसा ज्ञान, जिसे किसी वैज्ञानिक प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि ‘फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड’ के पवित्र ठप्पे के साथ हमारे पारिवारिक ग्रुप्स में तैयार किया जाता है।
यूनेस्को का थका हुआ ‘सर्वश्रेष्ठ’ पुरस्कार
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की सबसे प्रिय और उदार संस्था है ‘यूनेस्को’। इस बेचारी संस्था को खुद नहीं पता कि उसने भारत की कितनी चीज़ों को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित कर दिया है। पिछले हफ्ते ही एक संदेश वायरल हुआ कि यूनेस्को ने भारतीय ताली बजाने के तरीके को ‘सर्वश्रेष्ठ थैरेपी’ घोषित किया है। हैरानी की बात यह है कि पेरिस में बैठे यूनेस्को के महानिदेशक को अभी तक इस बात की ईमेल भी नहीं मिली है। लेकिन हमारे फूफा जी और जीजा जी ने इसे सुबह 6 बजे ग्रुप में भेजकर देश का मान अंतरिक्ष तक बढ़ा दिया है।
नासा के वैज्ञानिक और रसोई के नुस्खे
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का दूसरा बड़ा किरदार है ‘नासा’। नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में ब्लैक होल की खोज छोड़कर आजकल भारतीय रसोई में रिसर्च कर रहे हैं। व्हाट्सएप के एक वायरल दावे के अनुसार, अगर आप रात को सोते समय पैर के तलवों पर प्याज घिसेंगे, तो शरीर का सारा जहर बाहर आ जाएगा और नासा ने इस पर मुहर लगा दी है। अब बेचारे नासा के वैज्ञानिक अपनी दूरबीनें बेचकर सब्जी मंडी में प्याज के भाव पूछ रहे हैं। इस ‘व्हाट्सएप वायरल फैक्ट चेक’ का सीधा सच यह है कि प्याज केवल सलाद में अच्छा लगता है, पैरों में घिसने से सिर्फ कमरे में महक फैलेगी, जहर नहीं निकलेगा।
दस लोगों को भेजने का वैज्ञानिक चमत्कार
व्हाट्सएप का सबसे बड़ा ‘सत्य’ यह है कि यदि आप किसी चमत्कारी संदेश को ग्यारह लोगों को नहीं भेजेंगे, तो आपके साथ कोई अनहोनी हो जाएगी। इस महान डर के कारण लोग आधी रात को भी ‘शुभ प्रभात’ के साथ फूलों की तस्वीरें फॉरवर्ड कर रहे हैं। असली फैक्ट चेक यह है कि इस संदेश को डिलीट करने से केवल आपके फोन की मेमोरी बचती है, किसी की किस्मत नहीं बदलती।
निष्कर्ष: उंगली रोकें, दिमाग खोलें
अंत में, ‘काक-वाणी’ की मुफ्त सलाह यही है कि जब भी आपके पास कोई ऐसा संदेश आए जिसमें ‘नासा’, ‘यूनेस्को’ या ‘डॉक्टरों की गुप्त रिपोर्ट’ का हवाला दिया गया हो, तो अपनी उंगली को फॉरवर्ड बटन से दूर रखें। सच तो यह है कि दुनिया की कोई भी बड़ी संस्था आपके व्हाट्सएप ग्रुप पर आकर शोध पत्र जारी नहीं करती। अगली बार जब भी कोई ज्ञान मिले, तो उसे व्हाट्सएप की खिड़की से बाहर फेंक दें!