दिल्ली के रामलीला मैदान की हवा में एक अनोखा राजनीतिक चमत्कार देखने को मिला। कांग्रेस पार्टी की दूरबीनों ने मैदान में ऐसा ‘विशाल जनसैलाब’ देखा, जिसे शायद आम नागरिक अपनी नंगी आंखों से देखने में असमर्थ रहे। काक-वाणी के रिपोर्टर कौवे जब रामलीला मैदान के ऊपर मंडरा रहे थे, तो उन्हें ‘जनसैलाब’ की जगह ढेर सारी खाली कुर्सियां, कुछ निष्ठावान कार्यकर्ता और बहुत सारा राजनीतिक भ्रम दिखाई दिया। लेकिन जब कांग्रेस का चश्मा आंखों पर चढ़ा हो, तो सौ लोगों का समूह भी क्रांति की सुनामी नजर आने लगता है।
कुर्सियों का ‘सैलाब’ और कांग्रेस का अनोखा अंकगणित
कांग्रेस के प्रवक्ताओं की मानें तो रामलीला मैदान में इतनी भीड़ थी कि तिल रखने की जगह नहीं बची थी। अब यह अलग बात है कि तिल शायद फुटबॉल के आकार का था और मैदान की कुर्सियां बेचारी हवा खा रही थीं! लेकिन हमें कांग्रेस के इस गणित की तारीफ करनी होगी। आखिर जिस पार्टी को चुनावों में दो अंकों की सीटें मिलना भी ‘ऐतिहासिक वापसी’ लगता हो, उसके लिए कुछ सौ लोगों की मौजूदगी ‘विशाल जनसैलाब’ क्यों न कहलाए? पार्टी के कैमरामैनों को दाद देनी पड़ेगी, जिन्होंने लेंस को इतना जूम किया कि खाली मैदान भी जनसमूह में बदल गया।
‘ज्ञानेश जेल जाएंगे’ – राहुल जी की काल्पनिक जेल डायरी
इसी ‘विशाल भीड़’ के बीच हमारे परम ज्ञानी नेता राहुल गांधी जी ने अपनी चिरपरिचित धुन बजाई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ललकारते हुए सीधी चेतावनी दे डाली: “ज्ञानेश जेल जाएंगे!” काक-वाणी को राहुल जी का यह अटूट आत्मविश्वास बेहद पसंद आया। हालांकि, मैदान में खड़े निष्ठावान कार्यकर्ता भी एक-दूसरे का मुंह ताक रहे थे कि पहले सरकार कब बनेगी और जेल का वारंट किस जन्म में कटेगा?
राहुल जी आजकल जेल के टिकट ऐसे बांट रहे हैं, जैसे कोई रेलवे स्टेशन पर फ्री में पर्चे बांट रहा हो। कभी उद्योगपति, कभी जांच एजेंसियों के प्रमुख, तो कभी चुनाव आयोग—राहुल जी की इस ‘काल्पनिक जेल’ में अब बैरकों की कमी पड़ने लगी है। मजेदार बात यह है कि खुद जमानत पर बाहर रहने वाले नेता जब दूसरों को जेल भेजने की समय-सारणी जारी करते हैं, तो कौवे भी पेड़ से हंसकर गिर पड़ते हैं।
सच कहें तो, रामलीला मैदान का यह आयोजन मनोरंजन का एक बेहतरीन जरिया साबित हुआ। एक तरफ कुर्सियां अपनी किस्मत पर रो रही थीं, तो दूसरी तरफ राहुल जी भविष्य के जेल वार्डन की भूमिका में ढले हुए थे। काक-वाणी की कांग्रेस पार्टी को बस इतनी सी सलाह है—पहले सरकार बनाने लायक सीटें गिन लीजिए, उसके बाद जेल की सलाखों का नाप लीजिएगा। वरना जनता तो यही कहेगी: “न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी… और न ही ज्ञानेश जेल जाएंगे!”
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