वाह! जनता चुनती है सरकार? INDIA गठबंधन और CJP का यह ‘क्रांतिकारी’ ज्ञान!

नमस्कार देशवासियों! ‘काक-वाणी’ के इस विशेष संस्करण में आपका स्वागत है। आज हमारी कौआ-दृष्टि एक ऐसी खबर पर पड़ी, जिसने राजनीति के पूरे ब्रह्मांड को हिलाकर रख दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेपी (CJP) ने 1 नवंबर को होने वाली इंडिया (INDIA) गठबंधन की रैली का समर्थन करते हुए एक परम सत्य की घोषणा की है—‘जनता सरकार चुनती है, सरकार जनता को नहीं!’

अरे बाप रे! क्या बात है! इतना गहरा ज्ञान? हमें तो आज तक यही लगता था कि हर पांच साल में सरकारें एक कैटलॉग खोलती हैं और उसमें से अपनी मनपसंद जनता को चुनकर ऑर्डर करती हैं! यह क्रांतिकारी खुलासा सुनकर तो अरस्तू और सुकरात की आत्माएं भी स्वर्ग में बैठकर अपने ज्ञान पर पुनर्विचार कर रही होंगी।

परम ज्ञानी गठबंधन और सीजेपी का ‘ज्ञानोदय’

1 नवंबर को होने वाली महारैली से ठीक पहले इस ‘महाज्ञान’ का प्रकट होना कोई मामूली बात नहीं है। इंडिया गठबंधन के नेताओं को अचानक महसूस हुआ है कि भारतीय लोकतंत्र में जनता का भी थोड़ा-बहुत रोल होता है। धन्यवाद सीजेपी, जिसने इस गुप्त राज से पर्दा उठाकर संपूर्ण मानव जाति पर असीम अहसान किया है।

वैसे, हमारे देश की राजनीति का दस्तूर बड़ा मनमोहक है। जब कोई दल सत्ता की मखमली कुर्सी पर बैठता है, तो उसे लगता है कि जनता उसकी प्रजा है और वह जब चाहे, जैसे चाहे नियम थोप सकता है। लेकिन जैसे ही वही दल विपक्ष के बेंच पर आता है, उसे अचानक संविधान, लोकतंत्र और ‘जनता की संप्रभुता’ का ख्याल सताने लगता है। यह हृदय परिवर्तन इतना त्वरित होता है कि गिरगिट भी शर्म के मारे अपना रंग बदलना छोड़ दे।

रैली, भाषण और लोकतंत्र का पुनर्जन्म

अब जरा सोचिए, 1 नवंबर की इस रैली में क्या होगा? बड़े-बड़े पंडाल लगेंगे, भारी-भरकम लाउडस्पीकर बजेंगे और हमारे प्रिय नेता मंच पर खड़े होकर छाती ठोक-ठोक कर कहेंगे—’आप इस देश के मालिक हैं!’

उधर, बसों में भरकर लाई गई भोली-भाली जनता, जिसे दोपहर के खाने में एक पानी वाली सब्जी और दो पूरियां मिली हैं, तालियां बजाएगी। उसे अचानक अहसास कराया जाएगा कि अरे! हम तो मालिक हैं! हालांकि, रैली खत्म होते ही यह ‘मालिक’ फिर से बस के धक्के खाकर अपने टूटे हुए मकान और महंगाई से भरे राशन के डिब्बे की तरफ लौट जाएगा, और ‘सेवक’ अपनी चमचमाती गाड़ियों में उड़ जाएंगे।

काक-वाणी का निष्कर्ष

तो प्यारे मतदाताओं, 1 नवंबर की तारीख कैलेंडर पर नोट कर लीजिए! उस दिन आपको फिर से याद दिलाया जाएगा कि आप कितने शक्तिशाली हैं। लेकिन ध्यान रहे, यह शक्ति केवल वोट की तारीख तक ही मान्य है। चुनाव खत्म होते ही यह ‘ज्ञान’ अगले पांच साल के लिए कोल्ड स्टोरेज में डाल दिया जाएगा। तब तक के लिए, इस महान ‘ज्ञानोदय’ के लिए सीजेपी और इंडिया गठबंधन को ‘काक-वाणी’ का कड़वा नमन!


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कागा जी