यूनेस्को ने घोषित किया भारत का नया ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी फैक्ट चेक गाइड’

काक-वाणी के विशेष ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी ने आखिरकार अपने ‘सत्यशोधक विभाग’ (Fact-Check Department) का नया और डिजिटल संस्करण लॉन्च कर दिया है। अब तक आप लोग पीआईबी फैक्ट चेक और अन्य स्वतंत्र संस्थाओं के चक्कर में अपनी पसंदीदा और मसालेदार अफवाहों की बलि चढ़ा देते थे। लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी खबर को सच साबित करने के लिए अब किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है, बस कुछ आसान नियमों का पालन करना होगा।

नियम नंबर 1: ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ ही परम सत्य है

इस नए फैक्ट चेक एल्गोरिदम के तहत, यदि किसी संदेश के ऊपर ‘Forwarded many times’ यानी ‘कई बार भेजा गया’ का ठप्पा लगा है, तो वह संदेश अपने आप में अकाट्य सत्य माना जाएगा। विज्ञान, इतिहास और तर्क चाहे जो कहें, लेकिन अगर वह संदेश आपके फूफाजी, मौसाजी और कॉलोनी के शर्मा जी के माध्यम से आप तक पहुंचा है, तो उसमें संदेह करना ‘पारिवारिक राजद्रोह’ की श्रेणी में आता है।

नियम नंबर 2: ‘यूनेस्को’ और ‘नासा’ का तड़का लगाना अनिवार्य

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नए शोधकर्ताओं के अनुसार, किसी भी साधारण सी दिखने वाली खबर को वैश्विक स्तर पर प्रमाणित करने के लिए उसके आगे ‘यूनेस्को ने घोषित किया…’ या ‘नासा के वैज्ञानिकों ने हैरान करने वाला दावा किया…’ लिखना अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, “नासा ने चेतावनी दी है कि रात को हल्दी वाला दूध न पीने से मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म होती है।” इस खबर को अब किसी फैक्ट चेक की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसमें नासा का नाम शामिल है।

नियम नंबर 3: इमोजी की संख्या से तय होगी खबर की गहराई

नए नियम के अनुसार, जिस संदेश में जितने अधिक चेतावनी वाले लाल त्रिकोण (🚨), हाथ जोड़ने वाले इमोजी (🙏) या देशप्रेम दर्शाते तिरंगे (🇮🇳) होंगे, उसकी सत्यता उतनी ही अचूक होगी। यदि कोई संदेश केवल सामान्य अक्षरों में लिखा है, तो उसे तुरंत फर्जी घोषित कर दिया जाए। असली और प्रामाणिक खबर हमेशा चिल्लाते हुए शब्दों में और ‘इसे तुरंत ग्रुपों में फैलाएं’ के कड़े आदेश के साथ ही आती है।

तर्क की विदाई, भावनाओं का स्वागत

अंततः, इस नए फैक्ट चेक गाइड का मुख्य उद्देश्य इंसानी दिमाग को अतिरिक्त तनाव से बचाना है। जब बिना सोचे-समझे केवल दो क्लिक में ‘फॉरवर्ड’ दबाने से ही समाज का कल्याण हो रहा हो, तो गूगल पर जाकर सच खोजने की फालतू मेहनत क्यों करना? तो उठाइए अपना स्मार्टफोन, अपने विवेक को गहरी नींद में सुलाइए, और देश को डिजिटल बनाइए। क्योंकि जो ज्ञान सुबह-सुबह चाय की चुस्की के साथ व्हाट्सएप पर आया है, वह असत्य कैसे हो सकता है!

कागा जी