गाली-शास्त्र: भारतीय राजनीति का नया ‘व्याकरण’ और मर्यादा की अंतिम विदाई
लोकतंत्र के पावन मंदिर में अब तर्कों और सिद्धांतों की जगह ‘नए भाषाई अलंकारों’ ने ले ली है। ‘द हिंदू’ ने तो सिर्फ एक इशारा किया है, असल में तो हमारे माननीय नेताओं ने भाषा का ऐसा ‘शुद्धिकरण’ किया है… Continue Reading