समाजवाद का नया सिद्धांत: एक परिवार, पांच सांसद और असीमित ‘घरेलू’ विकास!

लोकतंत्र के इस पावन युग में जब पूरा देश ‘परिवारवाद’ के नाम पर छाती पीट रहा है, तब समाजवाद के परम ज्ञानी अखिलेश यादव ने ज्ञान की ऐसी गंगा बहाई है कि चाणक्य भी स्वर्ग में बैठकर अपनी नीतियां दोबारा… Continue Reading →

परिवारवाद नहीं, यह तो ‘होम डिलीवरी’ समाजवाद है, भाई साहब!

राजनीति के कुरुक्षेत्र में जब-जब ‘परिवारवाद’ पर तीर चलते हैं, तब-तब हमारे नेता ऐसे तर्क ढूंढ लाते हैं कि न्यूटन और आइंस्टीन भी अपनी कब्र में करवटें बदलने लगें। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने हाल ही में ज्ञान… Continue Reading →

समाजवाद का नया ‘पारिवारिक’ पैकेज: अखिलेश यादव की ‘घर-घर संसद’ योजना

लो जी, आखिरकार समाजवाद की सबसे क्रांतिकारी परिभाषा सामने आ ही गई! अब तक हम मूर्ख लोग समझते थे कि लोकतंत्र में जनता के बीच से नेता निकलते हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने हमारी राजनीतिक अज्ञानता… Continue Reading →

सौ दिनों में बदला भारत का ‘पॉलिटिकल मैट्रिक्स’: क्रांतिकारी बदलाव या सिर्फ कुर्सियों का नया संगीत?

अरे भाई साहब! अगर आपने हाल ही में ‘द वायर’ का वह ऐतिहासिक विश्लेषण नहीं पढ़ा, जिसमें बताया गया है कि कैसे पिछले सौ दिनों ने भारत के ‘पॉलिटिकल मैट्रिक्स’ को हिलाकर, मरोड़कर, बिल्कुल नया आकार दे दिया है, तो… Continue Reading →

गांधीजी का ‘अपरिग्रह’ बिका 14 करोड़ में: पूंजीवाद की गोद में मुस्कुराए बापू!

वाह रे दुनिया! और दोगुना वाह रे वैश्विक पूंजीवाद! जो इंसान जिंदगी भर ‘अपरिग्रह’ (जरूरत से ज्यादा संपत्ति न जुटाने) का उपदेश देता रहा, जिसके पास खुद की संपत्ति के नाम पर सिर्फ एक लाठी, एक चश्मा, एक घड़ी और… Continue Reading →

राहुल गांधी की ‘थाना-यात्रा’ और भाजपा का ‘अराजकता’ विलाप

देश के राजनीतिक रंगमंच पर एक नया और बेहद संवेदनशील अध्याय जुड़ गया है। अब तक हमने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ देखी थी, लेकिन अब देश ‘थाना जोड़ो यात्रा’ का गवाह बन रहा है। जैसे ही राहुल गांधी महोदय अपने लाव-लश्कर… Continue Reading →

क्या ‘ट्रांसफर किंग’ तुकाराम मुंडे राजनीति को भी ‘सैनिटाइज’ कर देंगे? काक-वाणी का विश्लेषण

महाराष्ट्र की राजनीति में वैसे तो रोज ही नए ड्रामे होते हैं, लेकिन हाल ही में जब ‘सिंघम’ कहे जाने वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे से राजनीति में आने का सवाल पूछा गया, तो राज्य के कई दिग्गज नेताओं के… Continue Reading →

100 दिन और बदल गया देश का ‘मैट्रिक्स’: क्रांतिकारी चश्मे का नया कमाल

अहा! क्या जादुई सुर्खी है। “सौ दिन जिन्होंने भारत के राजनीतिक मैट्रिक्स को बदल दिया।” इसे पढ़कर दिल को जो सुकून मिला, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। ऐसा लगा मानो न्यूटन के नियमों को धता बताते हुए देश… Continue Reading →

विपक्ष की ‘आहुति’ से मिला भाजपा को ‘प्राणवायु’: एक राजनीतिक चमत्कार!

लोकतंत्र का एक शाश्वत नियम है – जब आप काम न करें, तो जनता नाराज होती है। लेकिन भारतीय राजनीति का नया और आधुनिक नियम यह है कि जब जनता आपसे नाराज हो, तो विपक्ष को खुद ही मैदान छोड़कर… Continue Reading →

विपक्ष का ‘महायज्ञ’: खुद को स्वाहा कर सत्ताधारियों को जीवनदान देने की अद्भुत कला!

काक-वाणी के सभी सुधी पाठकों को कांव-कांव! लोकतंत्र का एक नया नियम बाजार में आया है – अगर आप परीक्षा में फेल हो रहे हों, तो चिंता मत कीजिए, बस बगल वाले सहपाठी को परीक्षा हॉल से ही बाहर करवा… Continue Reading →