UNSC को भारत की ‘सदाचार’ क्लास: जब भेड़ियों को शाकाहार का उपदेश दिया गया!

वाह! क्या बात है। इसे कहते हैं शेर की मांद में जाकर उसे शाकाहार का उपदेश देना। हाल ही में हमारे विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को एक अत्यंत ‘मासूम’ और गंभीर नसीहत दे डाली। भारत ने… Continue Reading →

नेताओं के ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ पर एफआईआर: जब चुटकुला बन जाए राजद्रोह

संविधान में ‘हंसने के अधिकार’ पर आपातकाल भारतीय राजनीति में आजकल एक नया संकट मंडरा रहा है—संवेदनशील त्वचा का संकट। हमारे भारतीय राजनेता इतने कोमल हृदय के हो गए हैं कि करोड़ों के घोटाले और भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े आरोपों को… Continue Reading →

धैर्य का ‘अमृत काल’ और ये ‘अधीर’ महिलाएं!

वाह! ‘द गार्जियन’ के गोरे पत्रकारों को भी भारत की महिलाओं के “धैर्य” खोने की बड़ी चिंता सता रही है। रिपोर्ट कहती है कि भारत की महिलाएं बदलाव के लिए बेहद ‘अधीर’ (इम्पेशेंट) हो चुकी हैं। अब भला कोई इन… Continue Reading →

सरकारी स्कूलों में ‘कॉकरोच क्रांति’: अब बच्चे नहीं, तिलचट्टे तय करेंगे शिक्षा का स्तर!

काक-वाणी के सभी सुधी पाठकों का तीखा स्वागत है! आज हम देश की उस महान और रेंगने वाली क्रांति पर बात करेंगे, जिसकी गूंज सात समंदर पार जर्मनी के ‘डीडब्ल्यू’ समाचार तक पहुंच गई है। जी हां, हम बात कर… Continue Reading →

राजनेताओं की ‘नाजुक त्वचा’ और जोक से उत्पन्न ‘राष्ट्रीय संकट’

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी क्या है? यहाँ के राजनेताओं की महान सहनशीलता! वे देश में बेरोजगारी, महंगाई और सड़कों के जानलेवा गड्ढों को तो बड़ी ही सहजता से पचा लेते हैं, लेकिन जैसे ही सोशल मीडिया पर उनके… Continue Reading →

सरकारी स्कूलों में ‘कॉकरोच क्रांति’: अब कीड़े तय करेंगे देश की शिक्षा का स्तर!

वाह! आखिरकार हमारे सरकारी स्कूलों को वह अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल ही गई, जिसके वे सालों से हकदार थे। जर्मन मीडिया ‘DW.com’ ने भारत के सरकारी स्कूलों में चल रहे ‘कॉकरोच आंदोलन’ पर विशेष रिपोर्ट छापी है। अब जलने वाले और… Continue Reading →

‘आउटसाइडर’ से ‘सिस्टम’ बने मोदी: अब दुश्मनों की भारी किल्लत, कहां से लाएं नया खलनायक?

मित्रों, राजनीति में सबसे बड़ा दुख क्या है? चुनाव हार जाना? नहीं। भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसना? बिल्कुल नहीं। राजनीति का सबसे बड़ा दुख यह है कि जब आप खुद ‘सिस्टम’ बन जाएं और आपके पास कोसने के लिए दुश्मनों… Continue Reading →

‘धैर्य’ की मर्यादा लांघती भारतीय महिलाएं और हमारे बेचारे नेता!

वाह! तो विदेशी मीडिया ‘द गार्जियन’ को आखिरकार भारत में कुछ नया दिख ही गया। उनका कहना है कि भारत की महिलाएं बदलाव के लिए ‘अधीर’ यानी ‘इम्पेशेंट’ हो रही हैं। अब भला इस महान देश में ‘अधीरता’ की क्या… Continue Reading →

सरकारी स्कूलों का नया ‘ब्रांड एंबेसडर’: आदरणीय कॉकरोच जी!

भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार की बातें तो हम बरसों से सुन रहे हैं। कभी डिजिटल ब्लैकबोर्ड की बात होती है, तो कभी मुफ्त मिड-डे मील की। लेकिन हाल ही में विदेशी मीडिया ‘डीडब्ल्यू’ की एक खबर ने हमारी आंखें… Continue Reading →

‘आउटसाइडर’ से ‘सिस्टम’ बने मोदी: अब दुश्मनों की घोर किल्लत, भाषण लेखकों में हाहाकार!

मित्रों, लोकतंत्र में सबसे बड़ी त्रासदी क्या है? गरीबी? बेरोजगारी? जी नहीं! सबसे बड़ी त्रासदी है एक महान और ओजस्वी नेता के पास रैली में कोसने के लिए ‘दुश्मनों’ का अकाल पड़ जाना। ‘द प्रिंट’ की हालिया रिपोर्ट ने देश… Continue Reading →