गार्डियन की ‘अधीर’ महिलाएं और सरकारी धैर्य का ‘अमृत काल’

पश्चिम का चश्मा और भारतीय नारी का ‘अति-उत्साह’ वाह! ‘द गार्डियन’ के गोरे पत्रकारों को आखिरकार भारत में कुछ ‘अधीर’ महिलाएं मिल ही गईं। वे लिख रहे हैं कि भारतीय महिलाएं बदलाव के लिए बहुत उतावली हो रही हैं। अब… Continue Reading →

रील्स, रिज़ और रायता: जब ‘जेन-ज़ी’ के सामने नतमस्तक हुआ हमारे बुज़ुर्ग नेताओं का ‘एंटायर पॉलिटिकल साइंस’

वाह! क्या क्रांतिकारी बदलाव है। कल तक जो भारतीय राजनेता देश के युवाओं को ‘भटके हुए नौजवान’ कहकर अपनी उबाऊ सभाओं में उपदेश झाड़ते थे, आज वे खुद इंस्टाग्राम रील्स पर अपनी ‘वाइब’ चेक करवा रहे हैं। ‘द वायर’ की… Continue Reading →

‘काक-वाणी’: ब्लूमबर्ग के ‘कॉकरोच आंदोलन’ से हिली दिल्ली की सल्तनत, मोदी जी की बढ़ी चिंता!

वाह रे ब्लूमबर्ग! तुम्हारी इस दिव्य और सूक्ष्म राजनीतिक दृष्टि को ‘काक-वाणी’ का शत-शत नमन। जब पूरी दुनिया भारतीय राजनीति में ‘चाणक्य नीति’, ‘डबल इंजन’ और ‘गारंटी’ के फेर में उलझी थी, तब न्यूयॉर्क के वातानुकूलित दफ्तरों में बैठे बुद्धिजीवियों… Continue Reading →

धैर्य रखिए देवियों! चुनाव अभी दूर हैं: ‘काक-वाणी’ की विशेष रिपोर्ट

विदेशी अखबार ‘द गार्जियन’ ने हाल ही में एक बड़ी अजीबोगरीब खबर छापी है। वे कहते हैं कि भारत की महिलाएं बदलाव और सुरक्षा के लिए ‘अधीर’ (impatient) हो रही हैं। अब भला बताइए, यह भी कोई बात हुई? हमारे… Continue Reading →

अल-जज़ीरा का नया आविष्कार: भारत का ‘कॉकरोच आंदोलन’ और मोदी की डगमगाती सल्तनत

दुनियाभर के लोकतंत्र की चिंता में दुबले हो रहे कतर के हमारे प्रिय स्वयंभू रक्षक ‘अल-जज़ीरा’ ने एक बार फिर भारत के भविष्य की सटीक भविष्यवाणी की है। इस बार उनकी दूरबीन में कोई बड़ा राजनेता या आंदोलनकारी नहीं, बल्कि… Continue Reading →

‘कॉकरोच’ क्रांति से डरी मोदी सरकार? अल-जजीरा की ‘कीट-पतंग’ पत्रकारिता पर काक-वाणी!

वाह! मान गए वैश्विक पत्रकारिता के इस अनूठे चमत्कार को। जब भारत में विपक्ष के सारे राजनीतिक पैंतरे फेल हो गए, तो कतर के महान बुद्धिजीवियों (अल-जजीरा) ने भारतीय राजनीति को हिलाने के लिए एक बेहद ‘क्रांतिकारी’ जीव को ढूंढ… Continue Reading →

धैर्य रखें देवियों! अमृत काल में ऐसी ‘अधीरता’ हमारे संस्कारी लोकतंत्र के खिलाफ है

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार ‘द गार्जियन’ ने हाल ही में एक अजीबोगरीब खबर छापी है। वे दावा कर रहे हैं कि भारत की महिलाएं बदलाव के लिए ‘अधीर’ (इम्पेशेंट) हो रही हैं और सड़कों पर उतर रही हैं। अब भला… Continue Reading →

लोकतंत्र का ‘सच्चा’ दीक्षांत समारोह: जब मुकदमों की संख्या तय करे आपकी योग्यता!

काक-वाणी: दाग अच्छे हैं, क्योंकि दागों से ही संसद के ‘टिकट’ मिलते हैं! वाह री हमारी भारतीय जम्हूरियत! हम साधारण नागरिक तो एक छोटी सी ट्रैफिक चालान की रसीद कटने पर भी सरकारी नौकरी के सपने देखना छोड़ देते हैं।… Continue Reading →

ड्रैगन का ‘पड़ोस-प्रेम’ और हमारी ‘लाल आंखें’: जब पड़ोसी ही बन गए चीन के ‘पेइंग गेस्ट’!

अहा! क्या अद्भुत कूटनीतिक समय है। जब सारा देश टीवी स्क्रीन पर ‘विश्वगुरु’ बनने की बधाई स्वीकार करने में व्यस्त है, तभी जर्मनी के ‘डीडब्ल्यू’ (DW) ने एक छोटी सी शरारत कर दी। उन्होंने खबर छाप दी कि दक्षिण एशिया… Continue Reading →

श्रद्धांजलि में ‘राजधर्म’ और यादों में ‘बुलडोजर’: काक-वाणी की विशेष रिपोर्ट

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प को याद किया। ‘काक-वाणी’ के दफ्तर की मुंडेर पर बैठे कौवे ने जब यह… Continue Reading →