श्रद्धांजलि में ‘राजधर्म’ और यादों में ‘बुलडोजर’: काक-वाणी की विशेष रिपोर्ट

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प को याद किया। ‘काक-वाणी’ के दफ्तर की मुंडेर पर बैठे कौवे ने जब यह… Continue Reading →

अपमान की ‘होम डिलीवरी’ और भाजपा का सिलेक्टिव रोना

भारतीय राजनीति में अब ‘अपमान’ कोई साधारण शब्द नहीं रहा, यह एक पूर्णकालिक उद्योग बन चुका है। ‘द प्रिंट’ का यह कहना बिल्कुल सही है कि भाजपा का यह चयनात्मक आक्रोश (सिलेक्टिव आउटरेज) भारतीय राजनीति में एक नई संस्कृति को… Continue Reading →

‘हम दो, हमारे अनगिनत’ को मिलेगा लोकतंत्र का सर्वोच्च इनाम: परिसीमन का नया खेल!

भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि यहाँ सजा और पुरस्कार के नियम बिल्कुल अनोखे हैं। साधारण दुनिया में नियम है कि जो अच्छा काम करे, उसे इनाम मिले। लेकिन हमारे महान संघीय ढांचे में नियम बिल्कुल उल्टा है। अगर… Continue Reading →

तरुण तेजपाल का ‘तहलका’ और रसूखदारों का ‘मौन व्रत’: न्याय के लिफ्ट की जादुई सवारी

वाह! क्या जादुई फैसला आया है। भारतीय न्यायपालिका और सत्ता के रसूखदारों के आपसी प्रेम को देखकर तो हमारी कौआ प्रजाति की आँखों में भी खुशी के आँसू आ गए। जब तरुण तेजपाल साहब को कोर्ट ने ‘सम्मानपूर्वक’ बरी किया,… Continue Reading →

लाल सलाम का ‘अदृश्य’ साम्राज्य: जब राज्य भय से थर-थर कांप उठा था!

अहा! इतिहास की धूल छानकर जब ‘द वायर’ जैसा क्रांतिकारी पोर्टल कोई नया हीरा निकालता है, तो दिल सचमुच बाग-बाग हो जाता है। हाल ही में उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि कैसे भारतीय कम्युनिस्टों ने एक ऐसा विशाल ‘जन… Continue Reading →

ईरान का ‘भारत-प्रेम’: जब-जब दुनिया आंखें दिखाए, हमें चाबहार याद आए!

काक-वाणी के पाठकों, वैश्विक कूटनीति के रंगमंच पर एक बार फिर ‘फेसबुक फ्रेंडशिप’ जैसी भावनाएं उमड़ रही हैं। ईरान के नए राष्ट्रपति साहब को अचानक भारत से अपने सदियों पुराने, ऐतिहासिक और ‘अटूट’ संबंधों की याद आ गई है। वैसे… Continue Reading →

अस्सी साल का ‘युवा’ लोकतंत्र और ‘रिन्यूअल’ की चमत्कारी फेयरनेस क्रीम

अस्सी की उम्र में ‘यूथ’ दिखने का नया फॉर्मूला अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने बड़े ही गंभीर लहजे में चिंता जताई है कि अस्सी की उम्र की दहलीज पर खड़ा हमारा भारतीय लोकतंत्र अब ‘रिन्यूअल’ यानी नवीनीकरण की तलाश में… Continue Reading →

लोकतंत्र @ 80: ‘रिन्यूअल’ की तलाश में भटकती जम्हूरियत और ‘री-साइकिल’ होते नेता

वाह! ‘द हिंदू’ अखबार के बुद्धिजीवियों को अचानक याद आया है कि हमारा लोकतंत्र 80 साल का होने को है और इसे ‘रिन्यूअल’ यानी नवीनीकरण की सख्त जरूरत है। वैसे, इस देश में ‘रिन्यू’ कराने की परंपरा बहुत पुरानी है—ड्राइविंग… Continue Reading →

रील-क्रांति: जब जेन-जी ने इंस्टाग्राम फिल्टर से बदली देश की राजनीति

काक-वाणी के सभी सुधी और ‘अल्ट्रा-मॉडर्न’ पाठकों को काकभुशुंडि का सादर प्रणाम। आज हम एक बेहद गंभीर, संवेदनशील और सबसे बढ़कर ‘ट्रेंडिंग’ मुद्दे पर बात करने जा रहे हैं। एनडीटीवी की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ‘जेन-जी’ (Gen-Z)… Continue Reading →

शहबाज शरीफ की ‘लाल स्याही’ और भारत का बहता पानी

दुनिया में जब भी हास्य और मनोरंजन का अकाल पड़ता है, हमारा प्यारा पड़ोसी देश पाकिस्तान तुरंत संकटमोचक बनकर सामने आ जाता है। हाल ही में अल-जज़ीरा की एक सुर्खी ने हमारे थके हुए चेहरों पर खिलखिलाती मुस्कान बिखेर दी… Continue Reading →